
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)13 सितंबर।कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर के प्रांगण में पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “कृषि सखियों का प्राकृतिक खेती विषय पर प्रशिक्षण” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में जिले के पाँच प्रखंडों से चयनित कुल 20 कृषि सखियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांतों, तकनीकों और व्यवहारिक पहलुओं से परिचित कराया गया, ताकि अपने क्षेत्र के किसानों को प्रशिक्षित एवं मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सच्चिदानंद सिंह (वैज्ञानिक, कृषि प्रसार शिक्षा) एवं डॉ. अजय कुमार मौर्य (वैज्ञानिक, एग्रोनॉमी) द्वारा किया गया। उन्होंने प्राकृतिक खेती में देशी गाय आधारित जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, मल्चिंग तथा फसल विविधीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में अंतिम दिन कृषि सखियों को प्रायोगिक शिक्षा हेतु प्रक्षेत्र भ्रमण भी करवाया गया। जिसमें कृषि सखियों ने कृषि विज्ञान केंद्र के प्रायोगिक प्रक्षेत्र सकड़ी एवं प्राकृतिक कृषि ग्राम कोसिहान कोईलवर का भी भ्रमण किया। इस कार्यक्रम में जिले के प्राकृतिक खेती के फार्मर्स मास्टर ट्रेनर श्री रविश रंजन ने भी कृषि सखियों के साथ अपने ज्ञान को साझा किया एवं उन्हें प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक स्वरूप से परिचित करवाया। कार्यक्रम में श्री अंशु राधे सहायक निदेशक रसायन ने मिट्टी जांच की उपयोगिता एवं उससे होने वाले लाभों के बारे में कृषि सखियों को अवगत करायाकेंद्र के अन्य वैज्ञानिकों ने भी प्रशिक्षणार्थियों को विषयगत जानकारी प्रदान की जिसमें डॉ. अनिल कुमार यादव (वैज्ञानिक, पशुपालन) ने पशुपालन एवं प्राकृतिक खेती के परस्पर संबंध पर प्रकाश डाला। सुप्रिया वर्मा (वैज्ञानिक, गृह विज्ञान) ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य एवं महिलाओं के स्वास्थ्य लाभ पर चर्चा की।डॉ. आलोक भारती (वैज्ञानिक, मत्स्य विज्ञान) ने जैविक तालाब प्रबंधन एवं मत्स्य पालन को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के उपाय बताए। डॉ. विकास सिंह (वैज्ञानिक, उद्यान विज्ञान) ने प्राकृतिक तरीके से फल एवं सब्जी उत्पादन तकनीक पर मार्गदर्शन दिया।समापन समारोह में प्रतिभागियों ने साझा अनुभव प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा और वे अपने गांवों में महिला किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी।
