शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान पर हुई विशेष चर्चा।
विभिन्न विषयों पर चर्चा कर यू.जी.सी. को भेजा गया प्रतिवेदन।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 24 अगस्त। उत्तराखंड के भीमताल में भारतीय विश्वविद्यालय संघ एवं राय विश्वविद्यालय झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी कार्यक्रम में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा शामिल हुईं। इस दौरान देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को लेकर विशेष चर्चा की गई। बताया गया कि वर्तमान में देश के 1073 कुलपति के पद में केवल 120 महिला कुलपति कार्यरत हैं, जो केवल 11.18 प्रतिशत ही है। बीते वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष महिला कुलपतियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस आंकड़े पर गौर करते हुए चर्चा हुई कि विश्वविद्यालयीन स्तर पर महिलाओं द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाना चाहिए।
सर्च कमेटी में महिलाओं को रखे जाने पर हुई चर्चा
इस दौरान सर्च कमेटी में महिला कुलपतियों को भी शामिल करने की बात रखी गई। उक्त कमेटी में सामान्यतः पुरुष ही होते हैं जिसके कारण पुरुषों को ही चुना जाता है। परंतु कम से कम एक महिला कुलपति को रखे जाने पर चर्चा की गई। यह भी बताया गया कि कुलपतियों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि जो जूनियर एवं योग्य महिलाएं हैं उन्हें यथासमय, यथासंभव बेहतर अवसर या अच्छे पदों के लिए नामांकित किया जाए ताकि वे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सकें। एक महिला में कई गुण होते हैं जिनका शैक्षणिक स्तर पर लाभ लिया जाना सरल होता है। कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एक महिला जब कुलपति बनती है तो उसके अंदर वात्सल्य एवं मातृत्व की भावना होती है, उसका लाभ विश्वविद्यालय को मिलता है। उसी मातृत्व भाव से वह विश्वविद्यालय को चलाती है जैसे परिवार को चलाती हैं। इस दौरान जेंडर अनुपात को ध्यान में रखते हुए थर्ड जेंडर को भी महत्व दिए जाने पर विशेष चर्चा हुई कि किस तरह उन्हें मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
गोद ग्रामों में संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने हो रहे विभिन्न आयोजन
कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने कार्यक्रम में यह भी बताया कि हमने 5 गांवों को गोद लिया है, जहां के लोगों को संगीत तथा कला के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कार्यशाला एवं विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। उक्त कार्य से सभी लोग उत्साहित हुए और कुलपति डॉ. शर्मा द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। भविष्य में इस तरह के कार्य किए जाने पर भी सभी ने निर्णय लिया। सभी कुलपतियों ने इस दौरान अपने विचार एवं अनुभव साझा किए और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
टेक्नोलॉजी के जमाने में महिलाओं को करें शिक्षित
कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए यह भी कहा कि ए.आई. जैसे महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के जमाने में मशीन से काम लेना चाहिए और लड़कियों तथा महिलाओं को साफ-सफाई जैसे कार्य से मुक्त कर बेहतर शिक्षा अर्जित करने प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे वे अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य कर पाएंगी। किस तरह अपने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेकर जाना है इसके लिए कमजोर पक्ष को मजबूत किए जाने को लेकर कुलपति ने अपनी बात रखी। दो दिवसीय उक्त संगोष्ठी समारोह में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से पहुंचे कुलपतियों के द्वारा विभिन्न विषयों पर क्रियान्वयन को लेकर चर्चा कर अनुमोदन हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को प्रतिवेदन भेजा गया।
सांस्कृतिक संध्या में संगीतमय कार्यक्रमों का लिया आनंद
कार्यक्रम के पहले दिन 21 अगस्त की शाम संगीतमय सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया जहां सभी कुलपतियों ने इसका भरपूर आनंद लिया। संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति होने के कारण प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने सभी कुलपतियों को अपने साथ गाना गाने के साथ ही नृत्य में भी शामिल किया। सभी कुलपतियों ने नृत्य संगीत में हिस्सा लेकर कार्यक्रम का आनंद लिया। सभी अपने साथ एक यादगार पल तथा विशेष जानकारी साथ लेकर गए, जिसमें इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की जानकारी भी शामिल है।

