
आरा /भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 अगस्त। रविवार को प्रतिभा खोज समिति कोईलवर प्रखंड भोजपुर आरा के तत्वावधान में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की 528 वीं और राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त की 139 वीं जयंती बड़े धूम धाम से मनाई गई। समारोह के मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय, रांची के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि यह प्रसन्नता का संदर्भ है कि प्रतिभा खोज समिति के बैनर तले हिंदी साहित्य के दो महाकवियों की जयंती एक साथ समवेत रूप में मनाई जा रही है।रामकथा की जो मंदाकिनी महर्षि वाल्मीकि मुखारविंद से नि:सृत हुई थी,वह जय देव,मुरारि, व्यास,कालिदास, भवभूति के मुखारविंद से प्रभावित होती हुई महाकवि गोस्वामी तुलसीदास और आधुनिक काल में राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त को प्राप्त हुईं।तुलसी ने रामकथा को लोकभाषा में प्रस्तुत कर उसको घर घर पहुंचा या और लोकप्रिय बनाया।तुलसी का मानस भारतीय सभ्यता, संस्कृति और दर्शन का खुला दस्तावेज है।उनकी कविता का उद्देश्य ही है :
कीरति भनिति भूति भल सोई।
सरसरी सम सब कह हित होई।
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त तुलसी के सच्चे उतराधिकारी हैं।उनका साकेत रामकथा की नवीन व्याख्या है। इसमें उपेक्षिता उर्मिला को अपेक्षिता और कलंकिता कैकेयी के कलंक को प्रक्षालित करने का उपक्रम राष्ट्र कवि ने किया है-यही उनकी महती उपलब्धि है। शाश्वत अतिथि के रूप में विचार प्रकट करते हुए डा महेश सिंह ने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण, गीता और श्रीरामचरितमानस ऐसे महान ग्रंथ हैं, जिनमें संपूर्ण भारतीय ज्ञान प्रस्फुटित हुआ है। अध्यक्षता कर रहे वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय भोजपुर आरा के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा नंद जी दूबे ने कहा कि तुलसी का मानस नाना पुराणनिगमाग और रामायण सम्मत है।तुलसी की सदाशयता विद्वता और विनम्रता उदाहरणीय ही नहीं,आज के जनमानस के लिए अनुकरणीय भी है। हिंदी वांग्मय का इतना बड़ा कवि राम चरित का आख्यान कर रहा है और कह रहा है:-
कवित विवेक एक नहीं मोरे।
सत्य कहौं लिखि कागद कोरे।
तुलसी ने परंपरा का अनुशरण किया और लिखा है कि:-
प्रथम मुनिन हरि कीरति गाई।
तेहि मग चलत सुगम मोहि भाई।
संगोष्ठी के आयोजक डा आनंद मोहन सिन्हा ने प्रतिभा खोज समिति के उद्देश्य पर गहन प्रकाश डाला।डा जनार्दन मिश्रा,डा सतीश कुमार सिन्हा और डा विष्णु देव सिंह ने अपनी कविताओं के माध्यम से अपनी भावाजंलि दी।इस शाश्वत अनुष्ठान में जिन विद्वानों ने अपने उद्गार से संगोष्ठी को सार्थकता और ऊंचाई प्रदान की-उनमें डा बलिराज ठाकुर,डा राम जी राय,डा दिनेश प्रसाद सिन्हा,डा कुमार शिव शंकर, शुभम् कुमार आदि प्रमुख हैं।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डा आनंद मोहन सिन्हा ने, सरस्वती वंदना डा ममता मिश्रा ने,कुशल संचालन डा सत्य नारायण राय ने और धन्यवाद ज्ञापन डा नथुनी पाण्डेय ने किया। संगोष्ठी की पूर्णाहुति शांति पाठ और राष्ट्र गान से हुई।
