
RKTV NEWS/ए सद्दाम बादशाह,04 अगस्त ।भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त है एक व्यक्ति–एक वोट का सिद्धांत। लेकिन जब कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर या गलत जानकारी देकर एक से अधिक वोटर कार्ड हासिल कर लेते हैं, तो वे इस सिद्धांत को सीधी चुनौती देते हैं। यह न केवल अपराध है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर हमला भी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के कई क्षेत्रों में ऐसे मामलों का खुलासा होने के बावजूद चुनाव आयोग इनके नाम सार्वजनिक नहीं करता। इससे इन्हें सामाजिक और कानूनी जवाबदेही से बचने का मौका मिल जाता है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि कौन लोग लोकतंत्र को कमजोर करने की ऐसी साजिशों में शामिल हैं।
इस अपराध में बड़ा सवाल उस BLO (Booth Level Officer) की भूमिका पर भी खड़ा होता है जो मतदाता सूची तैयार करने की प्रथम जिम्मेदारी संभालता है। यदि कोई व्यक्ति दो जगह से वोटर कार्ड बनवा लेता है तो यह या तो BLO की लापरवाही है या मिलीभगत।
अब समय आ गया है कि चुनाव आयोग डुप्लीकेट वोटर कार्ड रखने वालों के नाम सार्वजनिक करे और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करे। इससे जनता में यह संदेश जाएगा कि चुनाव प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों को बख़्शा नहीं जाएगा।
लोकतंत्र की रक्षा केवल भाषणों से नहीं, बल्कि दोषियों को बेनकाब करने और दंडित करने की साहसिक पहल से होती है।
