
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)01 अगस्त। गुरुवार को स्थानीय महाजन टोली नंबर 2 स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में जैन धर्म के तेइसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बड़े ही भक्तिपूर्वक मनाया गया। मुनि श्री 108 विशल्य सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में भगवान पार्श्वनाथ का पंचामृत अभिषेक, पूजन, मंगल आरती, वृहद शांतिधारा, निर्वाण लाडू समर्पण भक्तों के द्वारा किया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य डॉ श्वेता-भावेश जैन तथा प्रथम निर्वाण लाडू समर्पण करने का सौभाग्य डॉ सीपी-आदित्य विजय जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री का पाद प्रक्षालन रेशु-आकाश जैन तथा शास्त्र भेंट मंजुला-आदेश जैन के द्वारा किया गया। उक्त अवसर पर मुनिश्री ने भक्तों को संबोधित करते हुए बताया कि भगवान पार्श्वनाथ जी अपने कठोर तपस्या के क्रम में अनेकों उपसर्ग आए तथा उन्होंने उपसर्ग का सामना सहनशीलता और विवेक से किया जिससे उन्होंने अपने तपस्या पर विजय प्राप्त कर मोक्षगामी तीर्थंकर बने। हमें भी अपने जीवन में सहनशीलता धारण कर अपने जीवन के सभी कष्टों को दूर कर सकते है। मानव जीवन में 2 चीजें महत्वपूर्ण है पहला सहनशीलता तथा दूसरा उत्साहित होना। ये दोनों चीजें अगर आप में विद्यमान हो जाए तो सभी कार्य निरंतर संपन्न हो सकेगा। मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म के 24 तीर्थंकर में 20 तीर्थंकर की निर्वाण भूमि झारखण्ड राज्य के गिरीडीह जिला स्थित श्री सम्मेद शिखर जी है। शिखर जी के पर्वत पर भगवान पार्श्वनाथ जी स्वर्णभद्र कूट से सावन सुदी सप्तमी तिथि को मोक्ष हुए है आज के पावन दिवस पर विश्वभर में जैन समाज द्वारा अपने नजदीकी मंदिरों में अभिषेक, पूजन, निर्वाण लाडू समर्पण, पार्श्वनाथ विधान कर पुण्य अर्जित करते है। मंदिर प्रांगण को मधु-विमलेश जैन परिवार द्वारा भव्य रूप से सजाया गया था। दोपहर समय में श्री पार्श्वनाथ विधान श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में आयोजित था जिसके पुण्यार्जक शील जैन, छवि-अंशु जैन परिवार थे। कार्यक्रम के समापन पर अल्पाहार की व्यवस्था मंदिर प्रांगण में था जिसे सभी ने प्रसाद स्वरूप ग्रहण किए। निर्वाण महोत्सव को सफल बनाने में पंचायती मंदिर के संयोजक आकाश जैन सह संयोजक अजय जैन की भूमिका अहम रही। महोत्सव में डॉ आदित्य विजय जैन, ऋषभ चंद्र जैन, अजीत कुमार जैन, धीरेन्द्र चंद्र जैन, बिभु जैन, डॉ शशांक जैन, डॉ विकास चंद्र जैन, कमल कुमार जैन, अशोक कुमार जैन, मनोज जैन, मन्नू जैन, अजय जैन, रजत जैन, सुनील जैन, हर्षित जैन, ब्र. सुलोचना दीदी, विनीता जैन, दीप्ति जैन, पूनम जैन, पूर्णिमा जैन, जुली जैन, रोली जैन, अंजू जैन, सुधा जैन, नेहा जैन, भारती जैन, वार्ड पार्षद रेखा जैन के साथ सैकड़ों की संख्या में भक्तगण शामिल थे।
