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डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिल्ली में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय स्थापना दिवस पर भारत की जलवायु तैयारी संबंधी प्रमुख पहल घोषित किए।

19वें स्थापना दिवस पर डॉ. सिंह ने 14 वैज्ञानिक उत्पादों की घोषणा के साथ ही परिवर्तन दशक की सराहना की, डीप ओशन मिशन को भविष्य की अर्थव्यवस्था की कुंजी बताया।

RKTV NEWS/नई दिल्ली 28 जुलाई। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जलवायु-अनुकूल और वैज्ञानिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) द्वारा विकसित नए वैज्ञानिक उपकरण और डिजिटल सेवाओं का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने विज्ञान-संचालित सेवाओं के प्रति गहन जन सहभागिता और व्यापक जागरूकता का आह्वान किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में मंत्रालय के कामकाज, इसकी पहुंच और लोगों के जीवन पर इसके वास्तविक प्रभाव से उल्लेखनीय बदलाव आया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि विज्ञान और नवाचार पारिस्थितिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ ही आगामी दशकों में भारत के आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि अब हम उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां एक सामान्य उपयोगकर्ता भी अपने मोबाइल फोन पर लाइव मौसम अलर्ट, चक्रवात संबंधी चेतावनी, वायु गुणवत्ता अपडेट और समुद्री पूर्वानुमान की जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह मिशन मोड में काम करने वाली सरकार और एक ऐसे मंत्रालय के कार्य परिणाम हैं, जिसने स्वयं को नागरिक सेवा केंद्रित संस्थान के रूप में ढ़ाल लिया है।”
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के विभिन्न संस्थानों द्वारा विकसित 14 प्रमुख उत्पादों और पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। इनमें वर्षा निगरानी और फसल-मौसम कैलेंडर, भारत पूर्वानुमान प्रणाली – विस्तारित अवधि पूर्वानुमान (भारतएफएस-ईआरपी) जैसी उन्नत मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वर्षा डेटासेट, अद्यतन तरंग एटलस और समुद्र तल चार्ट, वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणालियां, समुद्री जैव विविधता रिपोर्ट और चार भारतीय शहरों के भूकंपीय सूक्ष्म क्षेत्रीकरण अध्ययन शामिल हैं। इस मौके पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा निर्मित “लाइफ सेविंग इम्पैक्ट” नाम की एक नई डाक्यूमेंटरी (वृत्तचित्र) भी रिलीज़ की गई।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले दस वर्षों में आये व्यापक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में आज डॉप्लर मौसम रडार की संख्या 15 से बढ़कर 41 हो गई है। इसी तरह, भूकंपीय और मौसम केंद्र, ऊपरी वायु प्रेक्षण प्रणालियां, आकाशीय बिजली का पता लगाने वाले नेटवर्क और वर्षामापी संयंत्र सभी दोगुने से भी अधिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अब भूकंप के दो से तीन मिनट बाद ही अलर्ट जारी कर दिये जाते हैं, जिन्हें लाखों लोग तुरंत ऑनलाइन देख पाते हैं। भूकंप की जानकारी प्राप्त करने वालों की संख्या इतनी अधिक है कि हाल में दिल्ली में आए भूकंप के दौरान भारी संख्या में इसके उपयोग से सर्वर क्रैश हो गए।
उन्होंने चक्रवाती तूफानों के पूर्वानुमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग की प्रगति की सराहना की और कहा कि अब मौसम की चरम स्थिति संबंधी चेतावनियां 10 दिनों की समय-सीमा में उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉ. सिंह ने स्मरण कराया कि कैसे 1999 के महाचक्रवात में ओडिशा में दस हजार लोगों के हताहत होने के बाद इस क्षेत्र में कई सुधार लाकर समय पर चेतावनी संबंधी प्रणाली विकसित की गई, जिससे हाल के तूफ़ानों में जान-माल की न्यूनतम क्षति हुई।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मंत्रालय अपने कार्यों द्वारा कृषि और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काफी सहयोग प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि सात लाख से अधिक किसान मंत्रालय के मेघदूत ऐप पर पंजीकृत हैं और बुवाई, सिंचाई और कटाई की योजना बनाने के लिए इसकी सलाह का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार, तटीय क्षेत्रों के मछुआरे सुरक्षित और ईंधन-कुशल मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों के निर्धारण के लिए दैनिक एसएमएस अपडेट का इस्तेमाल करते हैं।
डॉ. सिंह ने इस प्रकार के जन संचार और जन-सम्पर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अन्य मंत्रालयों और सरकारी संचार माध्यमों के साथ बेहतर समन्वय का सुझाव देते हुए कहा कि अभी भी बहुत से लोगों को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थानों द्वारा विकसित किए गए उपकरणों के बारे में जानकारी नहीं है। उन्हें उनकी ही भाषा में संवाद के जरिये जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के समुद्र-आधारित संधारणीय प्रयासों, खासकर लक्षद्वीप द्वीपसमूह का उल्लेख किया, जहां छह महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (ओटीईसी) विलवणीकरण संयंत्र अब प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर पेयजल उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र से घिरे होने के बावजूद, इन द्वीपवासियों को ताज़ा पानी नहीं मिलता था। अब उन्हें पर्याप्त ही नहीं, प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध हो रहा है।
डीप ओशन मिशन को एक संभावित क्रांतिकारी बदलाव बताते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अनन्वेषित (बिना खोज की गई) समुद्री संपदा भविष्य की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख चालक बन सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारा लक्ष्य अगले साल गगनयान के ज़रिए एक भारतीय को अंतरिक्ष में भेजना है, उसी तरह हम जल्द ही समुद्रयान के ज़रिए भारतीयों को समुद्र तल से 6 किलोमीटर नीचे गोता लगाते हुए देख सकते हैं। एक ऊपर, एक नीचे—यही हमारा अन्वेषण लक्ष्य है। (डीप ओशन मिशन भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में मौजूद संसाधनों की खोज करना, संधारणीय समुद्री विकास को बढ़ावा देना, और महासागरों से संबंधित विभिन्न प्रौद्योगिकियों का विकास करना है। इस मिशन का लक्ष्य 6000 मीटर की गहराई तक समुद्र में जाना और वहां मौजूद खनिजों, ऊर्जा स्रोतों और जैव विविधता का अध्ययन करना है)
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मंत्रालय का बजट 2014 के 1,281 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 3,658 करोड़ रुपये हो गया है, जिससे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं और उन्नत अनुसंधान को बल मिला है। डॉ. सिंह ने बदलाव का श्रेय मौजूदा केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग को दिया और वैज्ञानिक समुदाय से इसे और गति देने का आह्वान किया।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय स्थापना दिवस आयोजन में पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, संयुक्त सचिव डी. सेंथिल पांडियन, भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा तथा कार्यक्रम प्रमुख डॉ. विजय कुमार ने भाग लिया। इसमें विशिष्ट अतिथि के तौर पर टेक्सास विश्वविद्यालय में यूनेस्को अध्यक्ष प्रोफेसर देव नियोगी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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