RK TV News
खबरें
Breaking Newsआलेख

बिहार:नीतीश कुमार और बिहार की सियासत: गिद्धों के बीच एक जिंदा हकीकत।

RKTV NEWS/सद्दाम बादशाह 23 जुलाई।जब-जब बिहार में चुनाव आते हैं, एक पुराना सियासी मर्सिया फिर से सुनाई देने लगता है—”नीतीश कुमार खत्म हो गए हैं”, “अब उनका युग समाप्त होने वाला है”। ये बातें हम 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी सुन चुके हैं, 2020 के विधानसभा चुनाव में भी, और अब 2024 के बाद 2025 के विधानसभा चुनाव की दहलीज़ पर फिर से वही राग अलापा जा रहा है।
राजनीति के आकाश में चील, कौवे और सियार की तरह मंडराते ये सियासी गिद्ध हर बार उम्मीद करते हैं कि नीतीश अब गिरेंगे, अब टूटेंगे, अब बिखरेंगे। लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है, क्योंकि नीतीश कुमार एक सियासी जीवट हैं—जो मुश्किलों से जूझना जानते हैं, जो ज़मीन से जुड़े हैं और जिनकी जड़ें बिहार की जनता के दिलों में बसी हैं।

गिद्धों की राजनीति बनाम सृजन की सियासत

बिहार की राजनीति में ऐसे कई चेहरे हैं जो सुबह होते ही श्मशान की ओर नज़र डालते हैं—उन्हें किसी के पतन का इंतजार है। लेकिन याद रखिए, गिद्ध कभी घोंसले नहीं बनाते। वे सिर्फ लाशों पर जीते हैं। वहीं सृजनकर्ता अपने नाखूनों से भी घोंसले बना लेते हैं। वे प्रतीक्षा नहीं करते, वे निर्माण करते हैं।
नीतीश कुमार ऐसे ही सृजनकर्ता हैं। तीन दशक से अधिक के राजनीतिक जीवन में उन्होंने बिहार के हर क्षेत्र को छुआ है—शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, कानून-व्यवस्था या सामाजिक न्याय—हर जगह उनका हस्ताक्षर देखा जा सकता है। उनके विरोधियों के पास अखबारों की कतरनें और आंकड़ों की हेरफेर भले हो, पर नीतीश कुमार के पास जनता का विश्वास है, उनकी उपलब्धियों की लकीरें हैं।

विकल्प की तलाश या अफवाहों का व्यापार?

बिहार की सियासत में जब-जब नीतीश कुमार की विदाई की अटकलें लगती हैं, तब-तब सवाल उठता है—क्या कोई विकल्प मौजूद है? सच्चाई यह है कि कोई सच्चा विकल्प कभी किसी की मृत्यु की प्रतीक्षा नहीं करता। वह अपने काम, सोच और दृष्टिकोण से जगह बनाता है। जो लोग नीतीश कुमार के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं, वे न तो सृजन कर सकते हैं, न बिहार को दिशा दे सकते हैं।
आज बिहार की राजनीति के बाजार में अनेक दलाल और शोरगुल करने वाले मौजूद हैं। उनकी बातों में न गहराई है, न दृष्टिकोण। वे बस नीतीश कुमार को गिरता हुआ देखना चाहते हैं, परंतु न तो वे इतिहास जानते हैं और न ही जनता की नब्ज़। वे भूल जाते हैं कि नीतीश कुमार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक विचार हैं—एक शैली हैं—एक बदलाव की मिसाल हैं।

वोटर की ताकत नीतीश की असली ढाल

नीतीश कुमार की सियासत को खत्म करने वाले यह नहीं समझते कि उनका आधारवर्ग, उनका वोटर आज भी मजबूती से उनके साथ खड़ा है। बिहार के कम से कम 30% वोटर आज भी नीतीश के विकास मॉडल, उनकी ईमानदारी और उनकी सादगी के कायल हैं। यही वजह है कि कोई भी मीडिया ट्रायल, कोई भी गठजोड़, और कोई भी धोखा नीतीश कुमार को खत्म नहीं कर पाया—न आज तक, न भविष्य में।

नीतीश का रास्ता ही बिहार की राह

नीतीश कुमार की राजनीति को समझना है, तो समझना होगा कि यह राजनीति सत्ता के लिए नहीं, सेवा के लिए है। वह जनता की चुप्पी को समझते हैं, उनके दुख-दर्द को पहचानते हैं। उनकी राजनीति का मूल स्वभाव ही यही है—संवेदनशीलता, ईमानदारी और विकास।
आज जब सियासत दलदल बन चुकी है, जब भाषा गिर चुकी है और मूल्य ताश के पत्तों की तरह बिखर चुके हैं, तब नीतीश कुमार जैसे नेता की उपस्थिति बिहार के लिए एक सुकून है, एक भरोसा है।
अंत में: सियासी गिद्धों की संख्या चाहे जितनी हो जाए, घोड़े खरीद लेने से गांव वीरान नहीं हो जाते। नीतीश कुमार की सियासत आज भी ज़िंदा है—पूरे आत्मविश्वास के साथ। और जब तक बिहार में सोचने, समझने और सृजन करने वाले लोग मौजूद हैं, तब तक यह राजनीति जीवित रहेगी—नीतीश कुमार के रहते भी, और उनके बाद भी।

Related posts

चतरा:उपायुक्त ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटखोरी का किया औचक निरीक्षण।

rktvnews

पावन पवित्र कुंभ का देश!

rktvnews

देवघर:उपायुक्त के निर्देशानुसार जनता दरबार का किया गया आयोजन।

rktvnews

5 मार्च को आयोजित होगा नगर राम लीला समिति,आरा का होली मिलन समारोह।

rktvnews

सेवानिवृत्ति अध्यापिका ओमवीरी को शिक्षक दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ने उनके घर पहुंच कर किया सम्मानित।

rktvnews

आरा सदर प्रखंड में चलंत लोक अदालत आयोजित।

rktvnews

Leave a Comment