
आरा/भोजपुर( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)20 जुलाई।भाकपा (माले) ने आज आरा क्रांति पार्क में सोशल मीडिया से जुड़े कार्यकर्ताओं की एक अहम बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) की अराजक और असंवैधानिक प्रक्रिया को उजागर करना, और विगत 20 वर्षों से चल रही भाजपा-जदयू सरकार की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब करना था। इसके लिए एक संगठित सोशल मीडिया अभियान की रूपरेखा तय की गई।
बैठक में, केंद्रीय कमिटी सदस्य संतोष सहर, सोशल मीडिया के जिला प्रभारी का. चंदन कुमार, राज्य कमिटी सदस्य क्यामुदीन अंसारी ,आरा नगर सचिव का. सुधीर सिंह ,आरा मुफसिल सचिव विजय ओझा,एरिया सचिव रणधीर राणा ,नगर कमिटी सदस्य रौशन कुशवाहा, संदीप कुमार के अलावा विभिन्न वार्डो और पंचायतों से आए सोशल मीडिया पर सक्रिय साथियों ने भाग लिया।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
आरा विधान सभा में सक्रिय सोशल मीडिया टीम का गठन किया जाएगा, जो आरा विस में ऑनलाइन अभियानों को समन्वित रूप से संचालित करेगी।
प्रत्येक पंचायत में व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जाएंगे, जिनमें कम से कम 500 सदस्य जोड़े जाएंगे, ताकि जनसंपर्क और जनजागरूकता को तेज़ गति मिल सके।
50 युवा कार्यकर्ताओं की विशेष टीम बनाई जाएगी, जो सोशल मीडिया पर SIR की अनियमितताओं को उजागर करने के लिए वीडियो, पोस्ट, ग्राउंड रिपोर्ट और त्वरित प्रतिक्रिया जैसे उपकरणों का उपयोग करेगी।
यह पूरी टीम एक संगठनात्मक संरचना के तहत काम करेगी, जहां पंचायत से लेकर जिला स्तर तक लिंक और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
सभी कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे तकनीकी रूप से दक्ष और राजनीतिक दृष्टि से सजग होकर सोशल मीडिया पर हस्तक्षेप कर सकें।
बैठक में शामिल संतोष सहर ने कहा कि विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) भारत के चुनावी इतिहास की एक खतरनाक मिसाल है। यह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि करोड़ों गरीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और वंचित तबकों के मताधिकार को नष्ट करने की एक सोची-समझी साजिश है। इससे पहले देश के किसी भी राज्य में ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी, नेपाली, म्यांमारी नागरिकों के नाम शामिल होने की अफवाह फैलाकर असली भारतीय मतदाताओं को ही संदिग्ध बनाया जा रहा है। अगर विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में हैं, तो इसकी ज़िम्मेदारी सरकार और आयोग की है — न कि आम जनता की। यह एक भय फैलाने की राजनीति है।
आगे वक्ताओं ने कहा कि चुनाव आयोग बार-बार कह रहा है कि मतदाता को 11 दस्तावेज़ों में से कोई एक दिखाना अनिवार्य होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि बिहार की बड़ी आबादी के पास ये दस्तावेज़ हैं ही नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता, बावजूद इसके आयोग ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
उन्होंने कहा कि ERO को यह अधिकार देना कि वह किसी मतदाता की नागरिकता तय करे — यह संविधान और लोकतंत्र दोनों का घोर अपमान है। यह प्रक्रिया वास्तव में ‘वोटबंदी’ है — नोटबंदी की तर्ज़ पर मतदाता अधिकारों की जब्ती ।
बैठक में यह भी तय किया गया कि SIR के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान सोशल मीडिया पर संगठित रूप से चलाया जाएगा। इसके साथ-साथ भाजपा-जदयू शासन के 20 वर्षों के भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की दुर्दशा, किसान संकट और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी उजागर किया जाएगा।
भाकपा (माले) ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी वैचारिक और सांगठनिक संघर्ष को तेज किया जाएगा। पार्टी अपने हर स्तर के कार्यकर्ताओं को इस दिशा में सक्रिय करने हेतु प्रतिबद्ध है।
