
आरा/भोजपुर 15 जुलाई।सामाजिक कार्यकर्ता सरफराज अहमद खान व उनकी पत्नी,अ प्रा प्रधानाध्यापिका सबीहा बानो अल्लाह का सबसे पवित्र स्थान मक्का से तैंतालीस दिनों की लम्बी धार्मिक यात्रा करके घर लौट आये है।इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बातचीत कर हज यात्रा वृत्तांत की जानकारी समाज सेवी सरफराज जी से ली। धार्मिक यात्रा हज काफी कठिन,चालीस दिनों का, विदेश की धरती सउदी अरब और काफी खर्चीला भी है जो सबके लिए आसान नहीं है फिर भी प्रतिवर्ष लाखों लोग हज करने जाते हैं।
हज क्या है के जबाब में इन्होंने बताया की आखिरी पैगंबर मोहम्मद सल्लाहौ व इलैहे वासल्लिम इन्होंने जिन जिन स्थानों पर इंसानियत का पैगाम दिया उन स्थानों का भ्रमण करना ही हज है।
हज करने का निर्णय कैसे के जबाब में बताया की मेरी पत्नी की इच्छा थी साथ ही मुस्लिम धर्म में हज धार्मिक फर्ज में शामिल हैं।आर्थिक संकट नहीं रहने पर कोई भी हज कर सकता है। मध्यम वर्गीय परिवार है, बच्चों की पढ़ाई,शादी,मकान आदि सभी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गये थे, रिटायरमेंट का पैसा मिला था जिसका हम-दोनों ने सदुपयोग कर आखिरी फर्ज भी स्वस्थ्य रहते पूरा कर लिया।यात्रा के लिए हज कमिटी को आवेदन,उसका शुल्क जमा करने के बाद वीजा,टिकट के बाद दिल्ली से हवाई जहाज से मदीना सउदी अरबिया पांच घण्टे में पहुंच गये।
मदीना शरीफ में आठ दिन रूककर 40 वक्त का नमाज़ अदा करना है। मक्का में तीन दिनों तक शैतान को पत्थर मारने की प्रथा,हरम शरीफ में नवाज अदा करना , परिक्रमा करना, मक्का के कुएं का पवित्र जल (जमजम का पानी) ,जो रोगमुक्ति दायक के रूप में जाना जाता है। मोहम्मद साहब का लगाया गया खजूर का बाग प्रसाद के रूप में प्रसिद्ध है।मदीना में 9 दिनों का प्रवास,42 वक्त का नमाज़ अदा किया।सउदी अरब सरकार द्वारा हाजियों के लिए रहने खाने एसी पानी, आदि की समुचित व्यवस्था थी।इन्होंने बताया कि पूरी यात्रा में एक व्यक्ति का 3 लाख 30 हजार आने जाने का लगा। जिसमें रहने एवं लोकल ट्रैवल की सरकारी व्यवस्था थी।मात्र 6 दिनों का खर्च नास्ता खाना सऊदी अरब सरकार की ओर से फ्री था। हज कमेटी केवल हज से संबंधी जानकारियां देती है। पुरुष में सर मुंडन की प्रथा है, महिला का थोड़ा सा बाल कटवाना पड़ता है।
हज करने पर क्या लगा के जबाब में बताया की इबादत के लिए गया था जहां शांति पूर्वक पूर्ण हुआ।इतने दिनों से देश दुनिया परिवार से अलग रहा। काफी अच्छा लगा। हाजी बनने पर इन्होंने कहा कि मन की पवित्रता, झूठ ना बोलना, ऊंच नीच का भाव प्रदर्शित न करना, मन वचन कर्म से सही है तब सब ठीक है अन्यथा हज करने का कोई मतलब नहीं है। बताते चले की श्री अहमद 66 वर्षिय,ला ग्रेजुएट,जेपी सेनानी,केवल सामाजिक संगठनों, रेडक्रास से जुड़कर काम करते हैं, जर्नलिस्ट फोटो ग्राफ़र रह चुके हैं,सन दो हज़ार से ही चुनावीं राजनीति से अलग हो गये है।आरा पहुंचने पर शहर के हित मित्रों ने शुभकामनाएं दी है।
