
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)14 जुलाई।श्रावण समारधना के क्रम में श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा श्रीसहदेव गिरि मंदिर कतिरा में आयोजित सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के आज तीसरे दिन प्रवचन करते हुए आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि जो फल बड़ी-बड़ी तपस्याओं और उपासनाओं से नहीं मिलता वह भगवान शिव की शरणागति से प्राप्त हो जाता है। उन्होंने भगवान शिव के नन्दीश्वर, काल भैरव,गृहपति, एकादश रुद्र, दुर्वासा और हनुमान आदि अवतारों की कथा कहते हुए कहा कि दिव्य आत्माओं को भी संसार में आने पर विविध भय सताते हैं तथा मृत्यु, मूर्खता और त्रिविध ताप पीड़ित करते हैं किन्तु भगवान शिव की शरणागति से इन सबका शमन हो जाता है। आचार्य ने कहा कि शास्त्रों-पुराणों के श्रवण से हृदय में शुचिता,मन में निर्मलता और चरित्र में पवित्रता आती है। पुण्यों के बढ़ने से आयु बढ़ती है। भगवान शिव कालों के काल महाकाल तथा मृत्यु के ऊपर अमर मृत्युंजय हैं। उनके सन्निकट रहने से उपरोक्त संकट हमारे पास फटक भी नहीं सकते। आचार्य ने कहा कि भगवान शिव ने श्री हनुमान जी के रूप में अवतार लेकर रामायण में सर्वोत्तम सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि शिव पुराण में भी श्रीराम कथा का वर्णन हुआ है। रामायण और पुराण, गीता, उपनिषद् , भागवत ये सब हमारे अवलंब हैं, जीवन पथ के पाथेय हैं। प्रातः काल शिवार्चन, रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। स्वागत पुजारी अजय कुमार मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन मधेश्वर नाथ पाण्डेय ने किया।
