
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)13 जुलाई। स्थानीय जेल रोड स्थित श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में चातुर्मास के निमित्त पधारे क्रांतिकारी विचारक परम् पूज्य मुनि श्री 108 विशल्य सागर महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि आत्मकल्याण पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी है। आत्म कल्याण के लिये परिश्रम तो मनुष्य को स्वयं ही करना पड़ता है, पर सत्संग और सदुपदेश उसके प्रधान अवलम्ब हैं। हमारे कानों को सदुपदेश रूपी सुधा निरन्तर प्राप्त होती ही रहनी चाहिए।मनुष्य का स्वभाव चंचल है। इन्द्रियों की अस्थिरता प्रसिद्ध है। यदि आत्म सुधार में सभी इन्द्रियों को वश में रखा जाय तो उचित है। क्योंकि अवसर पाते ही इनकी प्रवृत्ति पतन की ओर होने लगती है। सदुपदेश वह अंकुश है, जो मनुष्य को कर्त्तव्य पथ पर निरन्तर चलते रहने को प्रेरित करता रहता है । सत्य से विचलित होते ही कोई शुभ विचार या स्वर्ण-सूत्र पुनः ठीक मार्ग पर ले आता है। जब हम अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं, तो हम न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए भी कल्याणकारी बनते हैं।
मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि मुनिसंघ के सानिध्य में शनिवार को श्री चंद्रप्रभु विधान का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में भक्तगण पूजन, विधान में शामिल हुए। विधान पुण्यार्जक रीना-अतुल चंद जैन परिवार था। मुनिसंघ के सचिव अजय कुमार जैन ने बताया कि रविवार को मुनिसंघ का चातुर्मास के निमित्त भव्य कलश स्थापना का कार्यक्रम तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित है जिसमें देशभर से इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए गुरुभक्त आरा पहुंच चुके है। कल 64 रिद्धि कलश का स्थापना भक्तगण के द्वारा किया जायेगा जिसकी समुचित तैयारी की जा चुकी है। बाहर से पधारे गुरुभक्त के लिए आवास एवं भोजन की समुचित व्यवस्था चातुर्मास समिति द्वारा किया गया है। संध्याकालीन कार्यक्रम में गुरुभक्ति, आरती, भजन, भक्ति नृत्य, व्यावृत्ति इत्यादि का कार्यक्रम आयोजित था।
