
RKTV NEWS/आरा(भोजपुर )03 जुलाई।आरा सांसद सुदामा प्रसाद आज लोकसभा के कृषि समिति की श्रीनगर में चल रही बैठक में शामिल हुए। वे लोकसभा में कृषि समिति के सदस्य होने के नाते केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान कि अध्यक्षता में चल रहे बैठक में देश के किसानों के कल्याण के लिए अपने अहम सुझाव दिए। जिसमें मुख्य रूप से निम्न था।
तेल बीज मिशन पर वीभिन्न बिंदु
1. एनएमईओ-ओपी का लक्ष्य 6.5 लाख हेक्टेयर से अधिक नए तेल पाम वृक्षारोपण का है, जिसमें असम को एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।हालांकि, तेल पाम एक जल-प्रधान और एकल फसल (मोनोकल्चर) है जिसे पारिस्थितिक दृष्टि से नाजुक क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे अरुणाचल की तलहटी और बराक घाटी जैसे जैव-विविधता संपन्न क्षेत्रों में वनों की कटाई की आशंका है, जो भारत के घोषित जलवायु और जैव-विविधता लक्ष्यों का उल्लंघन करता है।
2. इतने बड़े स्तर पर भूमि उपयोग में परिवर्तन के बावजूद, न तो कोई पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) किया गया है, न ही वन स्वीकृति प्रक्रियाएँ या समग्र पारिस्थितिक प्रभाव का मूल्यांकन। नाजुक वन क्षेत्रों या वन्यजीव गलियारों का मानचित्रण किए बिना तेल पाम को बढ़ावा देना जैव-विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (CBD) और पेरिस समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को कमजोर करता है।
3. प्रस्तावित विस्तार से आदिवासी और वन-निवासी समुदायों के अधिकारों को खतरा हो सकता है, जिनके वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के अंतर्गत दावे अभी लंबित हैं या मान्यता प्राप्त नहीं हुए हैं।एनएमईओ के तहत सामुदायिक भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए कोई संस्थागत तंत्र मौजूद नहीं है।
4. मिशन के तहत पौधों और कृषि इनपुट्स पर सब्सिडी दी जाती है, लेकिन तेल पाम के लिए न तो न्यूनतम मूल्य समर्थन है, न ही सरकारी खरीद तंत्र या बाज़ार तक सुनिश्चित पहुँच।ये छोटे और सीमांत किसान बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा तय की गई अस्थिर कीमतों के जोखिम में फ़साने का रास्ता हैं।
5. भूमि को एक गैर-खाद्य, व्यावसायिक फसल यानी तेल पाम के लिए हस्तांतरित किया जा रहा है, जिससे अनाज, दालें, या स्थानीय तिलहन जैसे सरसों और मूँगफली के लिए ज़मीन की उपलब्धता घटेगी । इससे स्थानीय खाद्य और पोषण विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
6. सरकार की यह नीति मानती है कि उत्तर-पूर्व के कृषि-जलवायु क्षेत्र आंध्र प्रदेश की तेल पाम सफलता को दोहरा सकते हैं, जबकि वर्षा, मिट्टी की संरचना, ढलान, जैव-विविधता और कृषि प्रणालियों में भारी अंतर है। असम की जटिल कृषि पारिस्थितिकी एकरूपी नहीं, बल्कि विविधतापूर्ण तेलहन रणनीति की मांग करती है।
प्राकृतिक खेती
1. एनएमएनएफ जिसे एक प्रमुख योजना बताया जा रहा है, लेकिन इसका 2025–26 बजट आवंटन केवल ₹616 करोड़ है, जबकि उसी वर्ष के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी ₹1.67 लाख करोड़ है। जब 8.5 करोड़ किसानों से बदलाव की उम्मीद की जा रही है, तो समान धनराशि क्यों नहीं दी जा रही? वर्ष 2022–2026 के चार वर्षों के लिए एनएमएनएफ का कुल बजट केवल ₹1,584 करोड़ है, यानी लगभग ₹400 करोड़ प्रति वर्ष, जबकि अकेले FY23 में फर्टिलाइजर सब्सिडी ₹2 लाख करोड़ से अधिक रही। ऐसे असमान आवंटन में कैसे “परिवर्तनकारी” और जलवायु उचित मॉडल को 8.5 करोड़ किसानों तक पहुंचाया जाएगा?
2. वर्ष 2023–24 में एनएमएनएफ के लिए ₹459 करोड़ का आवंटन किया गया, लेकिन केवल ₹30 करोड़ खर्च हुए, यानी महज़ 6% उपयोग। ऐसे कम वितरण के साथ, क्या यह “मिशन मोड” सिर्फ प्रचार तक ही सीमित नहीं रह जाएगा?
3. 2024–25 में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर ₹2.25 लाख करोड़ खर्च करने जा रहा है। वहीं, एनएमएनएफ किसानों को इस प्रणाली से बाहर निकलने को प्रोत्साहित करता है, लेकिन उनके लिए कोई प्रतिपूरक सहायता की व्यवस्था नहीं करता।
4. ऐसा बताया जा रहा है कि एनएमएनएफ में उत्पादन बीमा का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि खेती खासकर प्राकृतिक खेती शुरुआती वर्षों में कम उत्पादन की संभावना देती है। बीमा, एमएसपी या मूल्य समर्थन के बिना किसानों पर बोझ क्यों डाला जा रहा है?
5. कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस मिशन में 15,000 क्लस्टर, 10,000 बायो-इनपुट सेंटर और 30,000 कृषि सखी जैसे घटक शामिल हैं। लेकिन राज्य/जिला स्तर पर कोई संस्थागत जवाबदेही देखने को नहीं मिलती। ऐसे में मिशन के लक्ष्यों को अमल में कौन लाएगा?
6. एनएमएनएफ प्राकृतिक उत्पादों के लिए प्रमाणन और ब्रांडिंग का वादा करता है, लेकिन सप्लाई चेन, विपणन और अनुबंध खेती जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए कोई बजट निर्धारित नहीं किया गया है। इससे किसानों की कोई मोल-भाव शक्ति छीन उन्हें कॉर्पोरेट अनुबंध खेती की ओर धकेलने का रास्ता बनाती है ये नीति।
अंत मे उन्होंने कहा कि उपर्युक्त मुद्दों को गंभीरता से विचार किया जिससे किसान और देश का जलवायु पर सकरात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उक्त जानकारी सासंद सुदामा प्रसाद के निजी सहायक चन्दन कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
