
RKTV NEWS/गया(बिहार)29 जून।उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग बिहार पटना के निर्देशानुसार एवं जिला पदाधिकारी गया के आदेशानुसार, जिला उर्दु भाषा कोषांग गया के द्वारा फ़रोगे उर्दू सेमिनार व मुशायरा एवं उर्दू कर्मियों के कार्यशाला का आयोजन किया गया । जिसकी अध्यक्षता डॉक्टर सरताज अली खान पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने की तथा अहमद सगीर ने सेमिनार का संचालन किया। मुख्य अतिथि के रूप में कुमार पंकज ए.डी.एम., तथा राहुल कुमार सहायक निदेशक जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी उपस्थित थे। ए डी एम कुमार पंकज ने कहा कि उर्दू भाषा की ताकत ने मुझे बांध कर रखा है, उर्दू भाषा नहीं बल्कि यह एक विरासत है जिसे हमें संभाल कर रखना चाहिए। उर्दू को धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए, क्योंकि भाषा कोई भी सीख सकता है। मेरी दिली तमन्ना उर्दू सीखने की है। इसमें जो मिठास है, वही इसकी खूबी है।
कार्यक्रम की शुरुआत शम्मा जलाकर की गई तथा सभी अतिथियों, लेखकों एवं कवियों का सम्मान शॉल, स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में स्कूल एवं कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने,, शिक्षा के महत्व ,, पर अपने विचार व्यक्त किए। विचार व्यक्त करने वालों में निकहत नाज, खुशनामा परवीन, अनमता परवीन, माह नूर अंजुम, अरजीन उमैर और रहमत हाशमी के नाम खास हैं।
दूसरे सत्र में डॉ आफताब आलम, डॉ अहमद सगीर और डॉ आफताब आलम अतहर ,ने उर्दू भाषा के महत्व पर अपने मकाला प्रस्तुत किए। और डॉ सैयद अहमद कादरी ने प्रतिनिधि के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र के अंत में अध्यक्षीय भाषण देते हुए सरताज अली खान ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से उत्साह और उमंग पैदा होती है, ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। इससे न सिर्फ नए लेखक और कवि सामने आते हैं बल्कि छात्रों में उर्दू के प्रति जागरूकता भी आती है। और वे साहित्य की ओर आकर्षित होते हैं।
तीसरे सत्र में काव्य पाठ हुआ, जिसमें निम्नलिखित कवियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। इनमें नदीम जाफरी, हरिंदर गिरी शाद, तबस्सुम फरहाना, जमशेद अशरफ,मिस्बाहुद्दीन, इकबाल अख्तर दिल, नौशाद नादान, शाहिद निजामी, पल्लवी जोशी, चोंच ग्यावी आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। अहमद सगीर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ फ़रोग उर्दू सेमिनार व मुशायरा कार्यक्रम का समापन हुआ। गौरतलब है कि यह प्रमुख कार्यक्रम एस शकील अहमद, प्रभारी पदाधिकारी, जिला उर्दू भाषा कोषांग, गया और मुहम्मद फिरोज आलम, मुहम्मद दानिश, नासिक हसन शकीरीन और अन्य सक्रिय कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत के कारण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
