
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 जून।अस्पताल रोड स्थित सावित्री श्याम संगीत महाविद्यालय में विश्व संगीत दिवस अवसर पर सात दिवसीय लोकगीत कार्यशाला का समापन समारोह आयोजित हुआ। सर्वप्रथम जिला कला संस्कृति पदाधिकारी, डॉ दीपक कुमार, डॉ विजयलक्ष्मी शर्मा, वीणा सहाय, कावेरी मोहन, रेणु कुमारी इत्यादि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उदघाटन किया। केंद्राधीक्षक कावेरी मोहन ने आगत अतिथिओं का स्वागत किया। विद्यालय के अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार ने अपने भाषण में लोकगीत की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इन्होंने बताया कि लोकगीत दिल की गहराइयों से निकला हुआ भावनात्मक संवेग है जो सबके तन मन में बसा है।यह प्राचीन काल से है और निरंतर कानों में गुंजता रहेगा।
मंच संचालन करते हुए रंगकर्मी और वरिष्ठ पत्रकार शमशाद प्रेम ने विश्व संगीत दिवस के बारे मे जानकारी दी। कार्यशाला के प्रशिक्षक सह संगीत शिक्षक नागेंद्र नाथ पाण्डेय ने लोकगीतों के विभिन्न प्रकार एवं संस्कार गीतों के आधार के विषय में विस्तृत जानकारी दी। तत्पश्चात् रेड क्रॉस संस्था की सचिव डॉ विभा कुमारी, किरण कुमारी, अनुराधा सिंह, अम्बे शरण, अलका शरण, ऋषिका शर्मा , पीहू, अनुराधा, वंदना, आरूही,श्वेता, रितु, श्रेया, कृष।, इशिका, नम्रता, रीता देवी, संयोगिता, सिम्मी ने देवी गीत, शिव विवाह, राम विवाह, जोग, शगुन गीत, विदाई गीत, झूमर , तिलक, हल्दी, मटकोर, गुरुहाती, लावा मेराई, कन्यादान, सिंदूरदान, इमली घोटाई, सोहर, खिलौना, खेल गीत आदि लोकगीतों को गाकर माहौल बना दिया।एक से बढ़कर एक पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति की गई।संगत नागेन्द्र नाथ पाण्डेय, सरोज सुमन एवं कावेरी मोहन ने किया।कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अनुप्रिया जी ने सभी कलाकारों को उनकी प्रस्तुति के लिए बधाई देते हुए उन्हें प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।अपने भाषण में उन्होंने कहा कि यदि हमें अपनी संस्कृति से जुड़े रहना है तो अपने लोकगीतों से जुड़े रहना होगा। प्रतिभागियों की लगन देखकर वो अभिभूत थीं। कावेरी मोहन ने अनुप्रिया जी को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।धर्मेंद्र जी के धन्यवाद से कार्यक्रम का समापन हुआ।
