
RKTV NEWS/दरभंगा (बिहार)24 मई।दरभंगा जिला जीविका कार्यालय में डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया,जिसका उद्देश्य जीविका समूहों के वित्त पोषण को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।
इस कार्यशाला में जिले के सभी वित्तीय समावेशन नोडल कर्मियों ने भाग लिया। कार्यशाला में मुख्य रूप से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक विजय कुमार सिन्हा ने भाग लेकर सभी नोडल कर्मियों का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने अपने संबोधन में जीविका के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आज जीविका महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। यह संगठन आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है।
श्री सिन्हा ने जानकारी दी कि अगले माह विशेष ऋण वितरण शिविर के माध्यम से जीविका समूहों को कुल ₹50 करोड़ की राशि का वित्त पोषण किया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बैंकिंग प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए वे हर संभव सहयोग देंगे।
डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी ने कार्यशाला के दौरान कहा कि जीविका की दीदियों को आजीविका के स्थायी अवसरों से जोड़ने में बैंक ऋण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत समूहों को गृह आधारित उद्यमिता, पशुपालन, कृषि विपणन, वेंडिंग, दुकानदार व्यवसाय आदि क्षेत्रों में जोड़ा जाएगा। इसके लिए सभी प्रखंडों में बैंकर्स और समूहों के बीच समन्वय बैठकों की श्रृंखला चलाई जाएगी, जिससे संवाद और विश्वास का माहौल बनेगा।
सूक्ष्म वित्त प्रबंधक सुबीर झा ने अपनी प्रस्तुति में बताया कि जिला जीविका इकाई द्वारा वित्तीय वर्ष के लिए ₹550 करोड़ की ऋण सहायता का लक्ष्य तय किया गया है, जिसे विभिन्न बैंकों के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। इसके लिए ऋण आवेदन की समीक्षा, विशेष रणनीति और समयबद्ध फॉलोअप प्रणाली को सशक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी नोडलों की भूमिका को और मजबूत किया जाएगा ताकि फील्ड स्तर पर ऋण प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
कार्यशाला के दौरान उपस्थित नोडल कर्मियों को ऋण आवेदन प्रक्रिया, डिजिटल बैंकिंग सेवाओं जैसे AEPS, DBT, UPI आदि के प्रयोग, समूहों की वित्तीय साक्षरता और डाटा ट्रैकिंग के विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
इस पूरी कार्यशाला की रूपरेखा तैयार करने और संचालन में जिला वित्तीय समावेशन नोडल नीरज कुमार की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उन्होंने सभी उपस्थित नोडल कर्मियों को रणनीतिक दिशा देते हुए समूहों के साथ कार्यान्वयन की व्यावहारिक चुनौतियों पर भी संवाद स्थापित किया।
यह कार्यशाला दरभंगा जिले में वित्तीय समावेशन को नई दिशा देने वाली साबित हुई। इससे न केवल जीविका समूहों को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगा।
