
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)10 मई।सर्किट हाउस आरा में बिहार सरकार वित्त विभाग ,भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया, राज्य स्तरीय बैंकर समिति बिहार सरकार के द्वारा 17 फरवरी 2025 को राज्य स्तरीय बैंकर समिति की समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया है कि पाँच जिले मुंगेर,नालंदा ,भोजपुर,जहानाबाद एवं बक्सर मे साख जमा अनुपात कम है , इसलिए विशेष अध्ययन समिति का गठन किया गया है। इस विशेष समिति में पंजाब नेशनल बैंक के राज्य प्रमुख अध्यक्ष ,अग्रणी बैंक प्रबंधक सदस्य सचिव, बिहार ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष सदस्य, वित्त विभाग के नामित प्रतिनिधि, जिला अधिकारी अथवा नामित प्रतिनिधि सदस्य ,भारतीय रिजर्व बैंक के नामित प्रतिनिधि सदस्य ,नाबार्ड के नामित प्रतिनिधि सदस्य, क्षेत्रीय प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक संबंधित सदस्य। राज्य स्तरीय बैंक समिति बिहार संयोजक बैंक के नामित प्रतिनिधि की अध्यक्षता में बैठक की गई। इस बैठक में अध्यक्ष पंजाब नेशनल बैंक के राज्य प्रमुख बलीकरन यादव ,सदस्य सचिव जिला अग्नि बैंक प्रबंधक राजेश कुमार चौधरी, ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष आशुतोष कुमार झा सदस्य के रूप में ,बिहार सरकार वित्त विभाग के प्रतिनिधि अरुण कुमार सिंह ,जिला पदाधिकारी के प्रतिनिधि हीना जिला सदस्य, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि मोहित कुमार, नाबार्ड के प्रतिनिधि रंजीत कुमार सिन्हा ,भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार श्रीवास्तव , राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति बिहार संयोजक बिहार के प्रतिनिधि कुमार रंजीत सदस्यों ने भाग लिया। समिति का संचालन सदस्य सचिव अग्रणी बैंक प्रबंधक राजेश कुमार चौधरी के द्वारा किया गया। सभी का स्वागत अभिनंदन के बाद समीक्षा बैठक की कार्रवाई की गई समीक्षा बैठक में सकारात्मक रूप से विचार विमर्श किया गया है कि जिले का साख अनुपात कम है और इसे बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किया जाना चाहिए। सभी सदस्यों का विचार लिया गया ।वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2025 के अनुसार जिले का साख अनुपात 44.31 है जो राज्य के अनुपात से कम है ।परंतु जिले का शाखा अनुपात वर्ष दर वर्ष बढ़ोतरी हो रही है ।राज्य सरकार का यह प्रयास है कि जिले का साख अनुपात 50% किया जाए ।इस विषय पर विचार विमर्श हुआ। जिले का साख अनुपात अन्य जिलों के अपेक्षा कम है ।इसके कई कारण है सर्वप्रथम सेंट्रल बैंक आफ इंडिया इंडिया का साख अनुपात 15.69 % है सबसे कम है ।जिले में एमएसएमई क्लस्टर नहीं है। जिले में एनपीए एक बहुत बड़ा कारण है ।जिले में कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट नहीं है। भारतीय स्टेट बैंक से करीब 80 करोड़ फाइनेंस किया गया है जिसका फाइनेंस भोजपुर जिले में नहीं दर्शाया जाता है ।गरहनी का एथेनॉल प्रोजेक्ट जिसका वित्त पोषण चंडीगढ़ से है जिसका फाइनेंस करीब 500 से 700 करोड़ है। जिले में शामिल नहीं किया जाता है। भोजपुर जिले में 23 माइक्रोफाइनेंस है जिसका भी जिले में शामिल नहीं किया जाता है ।जिले का साख अनुपात किस प्रकार बढ़ाया जाए इस पर भी गंभीर रूप से विचार विमर्श किया और जो मुख्य बिंदु निकाल कर आया वह इस प्रकार है केसीसी डेरी फार्मिंग ,पोल्ट्री फार्मिंग, फिशरी फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाए। यहां पर धान एवं गेहूं की खेती काफी होती है परंतु हमारे यहां गोदाम या वेयरहाउस की कमी है इस पर भी फोकस किया जाए ताकि जिससे जिले का साख अनुपात में वृद्धि होगी ।भारत सरकार के द्वारा दो महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही है पीएमएफएमई एवं पीएमईजीपी जो सरकार के महत्वपूर्ण योजनाएं हैं बैंक इनको भी वित्त पोषित करेंगे और जिले का साख अनुपात में बढ़ोतरी होगी। ज़िला के प्रतिनिधि से अनुरोध किया गया है कि जमीन के अपडेशन को जल्द से जल्द किया जाए, जिले का एनपीए में बढ़ोतरी हो रही है सरकार के द्वारा इन दोनों पीडीआर केसेस पर बिहार विशेष ध्यान दिया जा रहा है ।इस संबंध में एसडीसी बैंकिंग के द्वारा कहा गया कि कि महीने में एक बार कोऑर्डिनेशन कमिटी की मीटिंग किया जाए जिसमें जीविका के जिला प्रभारी, कृषि विभाग के जिला प्रभारी , उद्यान विभाग के जिला प्रभारी, पीडीआर से संबंधित अधिकारी एवं सभी बैंकों के प्रबंधकों के बीच एक संयोजन समिति की बैठक किया जाएगा । समिति के अध्यक्ष द्वारा कहा गया है कि अध्ययन प्रतिवेदन बनाया जाएगा और जिले का साख अनुपात को 50% लेने के लिए सभी बैंक सहयोग करेंगे ।सभा का समापन बिहार राज्य स्तरीय समिति रंजीत कुमार के द्वारा किया गया अंत में धन्यवाद प्रस्ताव के बाद समिति की समीक्षा बैठक समाप्त किया गया।
