
शाहपुर/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 6 अप्रैल। भोजपुर जिला के शाहपुर नगर पंचायत क्षेत्र मे हो रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान संत आनंद बिहारी शास्त्री जी महाराज ने रामचरितमानस पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके श्रवण मात्र से ही समस्त पापों का नाश हो जाता है। रामचरितमानस नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक ज्ञान का ग्रंथ है जो नैतिक मूल्यों की धरोहर है। इसके श्रवण से पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके श्रवण से आत्मा की शुद्धि होती है जो पापों से मुक्ति दिलाने में सक्षम होता है। इस ग्रंथ में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के आदर्शों का वर्णन है। उन्होंने कहा कि अहंकारी मनुष्य का अहंकार उसके विनाश का कारण होता है। रावण जैसे विद्वान और शक्तिशाली राजा ने अहंकार के मद मे नीति और धर्म का उल्लंघन किया जो उसके विनाश का कारण बना। अपने शक्ति और तपस्या के घमंड में रावण देवताओं और ऋषि मुनियों को भी तुच्छ समझने लगा था। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने उसके घमंड को चकनाचूर कर उसका विनाश कर दिया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने अपने अटूट साहस, धैर्य, न्याय और आध्यात्मिक बल से रावण के अहंकार को तोड़ा और धर्म की स्थापना की। अंततः सत्य और धर्म की जीत हुई। महान मनीषी श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के सानिध्य में हो रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ से माहौल भक्तिमय एवं आध्यात्मिक बन चुका है। यज्ञ समिति के अध्यक्ष विजय सिंह, उपाध्यक्ष शारदानंद सिंह उर्फ गुड्डू यादव, कोषाध्यक्ष सत्यदेव पांडे, सचिव शिव प्रसन्न यादव, यज्ञ समिति के सदस्यगण सहित स्थानीय लोग महायज्ञ को सफल बनाने में लगे हुए है।

