जन-सहभागिता से तकनीक तक: अग्नि सुरक्षा सप्ताह के लिए बिहार की समग्र रणनीति तैयार।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)04 अप्रैल। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभाकक्ष में आज शुक्रवार को आगामी अग्नि सुरक्षा सप्ताह (14 से 20 अप्रैल) के सफल आयोजन हेतु एक उच्च स्तरीय पूर्व तैयारी बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण की उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने की। बैठक में प्राधिकरण के सदस्य पी.एन. राय, नरेंद्र कुमार, कौशल किशोर मिश्र, प्रकाश कुमार, सचिव मो. वारिस खान सहित विभिन्न हितधारक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। राज्य के सभी जिलों से अपर समाहर्ता, सहायक जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी एवं जिला अग्निशमन पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे। बैठक में अपने-अपने जिलों के स्तर पर सप्ताह के दौरान आयोजित की जानेवाली गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा की गई।
बैठक में अग्नि सुरक्षा सप्ताह (14 से 20 अप्रैल) के आयोजन को लेकर सभी जिलों के लिए निम्नलिखित कार्य किए जाने का निदेश दिया गया।
राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान
• नुक्कड़ नाटक, प्रभात फेरी, सुरक्षा रथ, और एलईडी वैन के माध्यम से फिल्म प्रदर्शन।
• पोस्टर, पंपलेट और होर्डिंग के ज़रिए अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूकता।
• विद्यालयों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम।
फायर ब्रिगेड की पूर्व-स्थिति तैनाती
• अग्निशमन वाहनों को अगलगी की दृष्टि से प्रवण पंचायतों और प्रखंड स्तर तक तैनात करने का निर्णय लिया गया।
• संवेदनशील और अगलगी की आशंका वाले इलाकों की पहचान कर सघन जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर सहमति बनी।
मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम
• NDRF, SDRF और फायर सर्विस के सहयोग से मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।
• स्थानीय लोगों को अग्नि सुरक्षा उपायों और प्राथमिक सहायता की जानकारी देना।
• फायर फाइटिंग डेमो के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण।
मौसम और सैटेलाइट डेटा का उपयोग
• बिहार मौसम सेवा केंद्र एवं इसरो के सहयोग से अग्नि प्रवणता वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान।
• सैटेलाइट डेटा के माध्यम से उच्च तापमान, कम आर्द्रता और पछुआ हवा वाले क्षेत्रों की रियल टाइम मॉनिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी संबंधी सूचनाओं को फायर स्टेशनों तक अग्रिम रूप से पहुँचाई जाएगी।
शहरी और ग्रामीण रणनीति
• शहरी क्षेत्रों में शॉर्ट सर्किट से आग की घटनाओं पर निगरानी और नियंत्रण।
• कम गुणवत्ता वाले बिजली के तारों की बिक्री पर प्रतिबंध के निर्देश।
• ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों को जिम्मेदारी देकर एवं प्राधिकरण द्वारा प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयं सेवकों का सहयोग एवं भागीदारी सुनिश्चित करना।
जल स्रोत और संसाधनों की तैयारी
• प्रत्येक गाँव में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया जिससे अगलगी होने की स्थिति में त्वरित रूप से उसका उपयोग किया जा सके।
सामुदायिक भागीदारी
• ‘आपदा मित्र’, एनसीसी, सिविल डिफेंस, स्काउट्स एंड गाइड्स को सक्रिय रूप से अभियान में शामिल करना।
• स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों को जोड़कर सामूहिक प्रयासों को बल देना।
पटना के लिए विशेष योजना
• पटना जिले में अगलगी की घटनाओं की रोकथाम हेतु हॉट स्पाट्स को चिन्हित करके कार्य करने हेतु एक विशेष टीम गठित की गई। जिसकी जिम्मेदारी पटना के एडीएम श्री डी.पी. शाही को सौंपी गई है।
इस अवसर पर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ उदयकान्त ने कहा कि AI और मशीन लर्निंग तकनीक के उपयोग, सैटेलाइट डेटा की सहायता से आग की घटनाओं की तत्काल सूचना जिला स्तर पर पहुँचाई जा सकेगी। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में शॉर्ट सर्किट से होने वाली आग की घटनाओं पर चिंता जताई और बाजार में कम गुणवत्ता वाले तारों की बिक्री पर नियंत्रण के निर्देश दिए।
पी.एन. राय ने अपने संबोधन में कहा कि फायर सर्विस कर्मियों को हर स्तर पर सहयोग दिया जाए, उनकी प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाई जाए, और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ‘आपदा मित्र/सामुदायिक स्वयं सेवकों को सक्रिय रूप से जोड़ने और गाँवों में जलस्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
बिहार अग्निशमन सेवा की ओर से आई.जी. श्री सुनील कुमार नायक ने सप्ताह के दौरान प्रस्तावित कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फायर सर्विस की टीमें समुदाय के बीच जाकर अग्नि सुरक्षा के उपायों पर जागरूकता फैलाएँगी।
बिहार मौसम सेवा केंद्र के निदेशक डॉ. प्रभु ने उपग्रह आधारित तापमान, आर्द्रता और पछुआ हवा जैसे कारकों पर आधारित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और त्वरित चेतावनी प्रणाली पर प्रस्तुति दी। यह जानकारी फायर सर्विस को पूर्व चेतावनी के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी जिससे समय रहते कार्रवाई संभव हो सकेगी।
मंच संचालन प्राधिकरण के वरीय सलाहकार डॉ. जीवन कुमार ने किया। इस बैठक में प्राधिकरण के पदाधिकारीगण सहित पंचायती राज, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आपदा प्रबंधन विभाग सहित विभिन्न हितधारक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

