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उपेक्षित है वीर बांकुड़ा कुंवर सिंह का शिवपुर घाट स्मारक:शाहपुर(भोजपुर) से राकेश मंगल सिन्हा की विशेष रिपोर्ट।

शाहपुर/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 26 अप्रैल। वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह का शिवपुर घाट स्थित स्मारक उपेक्षित है और अपनी सफाई की बाट जोह रहा है। विजयोत्सव के दिन भी बाबू कुंवर सिंह के नाम पर बनाया गया स्मारक उपेक्षित रहा। वहां पर श्रद्धा सुमन अर्पित करना तो दूर, उस स्मारक की साफ-सफाई तक नहीं की गई है। घास-फूस, लत्तर और झाड़ीनुमा पौधे करोङों रुपये की लागत से बने इस स्मारक की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस स्मारक की साफ सफाई की चिंता भी प्रशासनिक पदाधिकारियों को नहीं है। भोजपुर जिले के जगदीशपुर अनुमंडल के शाहपुर प्रखंड अंतर्गत पङने वाला शिवपुर घाट वह ऐतिहासिक स्थल है जहां बाबू कुंवर सिंह ने गोली लगे अपने हाथ को काट कर मां गंगा को समर्पित कर दिया था। फिरंगियों से लड़ाई के दौरान 22 अप्रैल 1858 को बाबू कुंवर सिंह के हाथ में गोली लगी थी। गोली का जहर पूरे शरीर में फैलने से पहले ही उन्होंने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए अपने जख्मी भुजा को काट कर गंगा नदी में समर्पित कर दिया था। बाबू कुंवर सिंह के सम्मान में सरकार द्वारा उनका स्मारक शिवपुर घाट पर बनाया गया है। लगभग 2 बीघे में इस स्मारक का निर्माण किया गया है। पूरे क्षेत्र को पाइलिंग करके बाउंड्री दिया गया है। बाउंड्री में ग्रिल भी लगाया गया है ताकि बाहर से भी विशाल तलवार को देखा जा सके। इसके भीतर बाबू कुंवर सिंह की तलवार लगाई गई है। जमीन के भीतर काफी गहराई तक गड्ढा करके छङ, बालू, गिट्टी और सीमेंट के कंक्रीट का पिलर ढाला गया है। उसके ऊपर बाबू कुंवर सिंह का प्रतीक चिन्ह तलवार लगाया गया है। उसे ग्रेनाइट और पत्थर से संवारा सजाया गया है। यह पूरा क्षेत्र जमीन से काफी ऊंचा है जो बाढ़ आने पर भी नहीं डूबता है। इसके मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है। इसका निर्माण कार्य वर्ष 2017-18 में शुरू हुआ और वर्ष 2020-21 में पूरा हुआ। इसी बीच लॉकडाउन और कोरोना काल भी आया। इस स्मारक को बनाने में लगभग 3 करोङ रुपये की राशि लगी है। हालांकि इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह के नाम पर बना स्मारक उनके विजयोत्सव के दिन भी उपेक्षित रहा। इस स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का कष्ट भी किसी नेता,जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी ने नहीं उठाया। श्रद्धा सुमन अर्पित करना तो दूर इस परिसर में उगे झाङ – झंकार, घास और जंगली पौधों की सफाई की भी चिंता किसी ने नहीं की। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा लगाई गई इतनी बड़ी राशि एक तरह से बर्बाद ही है।

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