RK TV News
खबरें
Breaking Newsधार्मिक

इस वर्ष शुक्रवार को पड़ने वाला सतुआन होगा शुभ फलकारी:ज्योतिषाचार्य संतोष।

RKTV NEWS/ज्योतिषाचार्य संतोष पाठक,13 अप्रैल।सत्तू सक्रांति या सतुआ सक्रांति भी कहते हैं।इसी के साथ खरवास समस्त हो जाएगा किंतु गुरु के अस्त के कारण विवाह आदि शुभ कार्य के लिए मुहूर्त शुरू नहीं हो पाएगा।
सत्तू खाना खिलाना एवं ऋतु फल के साथ सत्तू का दान करना पुण्य कारक को होगा।
यह सक्रांति वर्ष भर की सबसे महत्वपूर्ण संक्रांति होती है।इसमें गंगा स्नान करके दान पुण्य करना अत्यंत पुण्य फल कारक माना जाता है।चूंकि सूर्य की सक्रांति शुक्रवार के दिन पड रही है इसीलिए संवत्सर के मंत्री का पद शुक्र ग्रह को प्राप्त हो गया है।
शुक्रवार की संक्रांति शुभ फल कारक होगी एवं दैनिक उपभोग कि वस्तुये जैसे फल-सब्जी, छेना,पनीर ,दूध ,दही इत्यादि का भाव सस्ता ही चलेगा।
कृष्ण पक्ष में तिथि का टूटना शुभ फल कारक माना जाता है।
कूल मिलाकर यह पक्ष देश काल एवं जनता के लिए शुभ फलकारी है अमावस्या चतुर्ग्राही आंधी पानी बरसा करा सकते है।
सूर्य के मीन से मेष राशि में आने के दिन को मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है. वहीं इसे उत्तर भारत के लोग सत्तू संक्रांति या सतुआ संक्रांति के नाम से जानते हैं. इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण की आधी परिक्रमा पूरी कर लेते हैं। इसके साथ ही खरमास का समापन हो जाता है और सभी प्रकार के मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।मेष संक्रांति को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाते हैं।इसे उत्तर भारत समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में सतुआन के रूप में मनाते हैं और इस दिन अपने इष्ट देव को गुड़ (मीठा) सत्तू अर्पित करते हैं और इसके बाद खुद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. आइए जानते हैं इस साल कब है सतुआन और क्या है इसे मनाने का महत्व…
क्यों मनाने हैं सतुआन का पर्व?
सामान्यतः हर वर्ष सतुआन का पर्व 14 या 15 अप्रैल को ही पड़ता है. इस साल यह पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। बता दें कि इस दिन सूर्य राशि परिवर्तित करते हैं।इसके साथ ही इस दिन से ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है। सतुआन के दिन सत्तू खाने की परंपरा बहुत लंबे समय से चली आ रही है. इस दिन लोग देवी देवता को मिट्टी के घड़े में पानी, गेहूं, जौ, चना और मक्के का सत्तू साथ में आम का टिकोरा अर्पित करते हैं। इसके बाद इसे खुद प्रसाद के रूप में ग्रहण भी करते हैं।
आज ही के दिन शिव मंदिर में शिवजी की ऊपर जलधारा (पानी वाला घड़ा) लगाया जाता है।

Related posts

जयपुर:संविधान के प्रति अश्रद्धा पैदा ना करें और ना करने दें – विधानसभा अध्यक्ष

rktvnews

वाराणसी में एनएसई और वाराणसी जिला प्रशासन द्वारा निवेशकों की समझ बढ़ाने हेतु विशेष सेमिनार और वर्कशॉप का आयोजन संपन्न।

rktvnews

देहरादून: राज्यपाल ने लोक भवन में एसओएस बाल ग्राम,भीमताल के बच्चों से किया आत्मीय संवाद।

rktvnews

महिला कॉलेज में शतरंज प्रतियोगिता का हुआ आयोजन!शतरंज से मस्तिष्क का होता है विकास:प्रो मीना कुमारी

rktvnews

प्रधानमंत्री और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भारतीय और ब्रिटिश उद्योगपतियों से मुलाकात की।

rktvnews

मुजफ्फरपुर:धान अधिप्राप्ति में 99.96% व भुगतान में 100% सफलता, CMR आपूर्ति में तेजी लाने का सख्त निर्देश।

rktvnews

Leave a Comment