पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 23 अप्रैल। विरोधी दलों के नेताओं पर चुनाव आयोग अतिरिक्त सक्रियता दिखाता है। वही चुनाव आयोग राजस्थान की चुनावी सभा में प्रधानमंत्री जी द्वारा समाज को विभाजित करने और नफरत फैलाने वाले भाषण पर मौन क्यों है ? चुनाव आयोग का मौन रहना आयोग की तटस्थता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। यह मानना है राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी का। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण जनप्रतिनिधित्व कानून और आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसा चुनाव आयोग जिसकी तटस्थता पर संदेह हो, उसके निर्देशन में होने वाले चुनाव की निष्पक्षता पर लोग कैसे यकीन करेंगे। इसलिए जनता की नजरों में अपनी तटस्थता और निष्पक्षता को जाहिर करने के लिए चुनाव आयोग तत्काल आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में प्रधानमंत्री पर कार्रवाई करे।
