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भोपाल:ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने मानव संग्रहालय में भारतीय सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं एवं सभ्यतागत विरासत का किया अविस्मरणीय अनुभव।

भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)06 अगस्त।संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (आईजीआरएमएस), भोपाल में आयोजित तृतीय ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह (Cultural Working Group) बैठक के अंतर्गत बुधवार को ब्रिक्स सदस्य देशों ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इथोपिया ईरान, इंडोनेशिया तथा संयुक्त अरब अमीरात के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों ने संग्रहालय परिसर का भ्रमण कर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं लोक विरासत का निकट से अवलोकन किया।

प्रतिनिधिमंडल ने संग्रहालय की मुक्ताकाश प्रदर्शनी के अंतर्गत कुम्हार पारा, पारंपरिक तकनीकी उद्यान तथा हिमालयन विलेज प्रदर्शनी का भ्रमण किया। एक ही परिसर में भारत के विविध सांस्कृतिक क्षेत्रों, लोक जीवन, पारंपरिक आवास, शिल्प, तकनीकों एवं जनजातीय विरासत के सजीव प्रस्तुतीकरण को देखकर विदेशी प्रतिनिधियों ने विशेष प्रसन्नता व्यक्त की तथा संग्रहालय द्वारा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रस्तुतीकरण के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने केरल की पारंपरिक धरोहर “आल-विलक्कु (ആൽവിളക്ക്)”—1001 दीपकों वाले भव्य अनुष्ठानिक दीप—के प्रज्वलन का भी अवलोकन किया और स्वय भी द्वीप प्रज्वलन किया और दीपक के साथ सेल्फी भी ली संग्रहालय परिसर में स्थापित यह लगभग 15 फीट ऊँचा तथा 1,830 किलोग्राम वजनी विशाल कांस्य (बेल मेटल) दीपक पारंपरिक लॉस्ट वैक्स तकनीक से निर्मित भारतीय धातु शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है। 13 वृत्ताकार स्तरों में निर्मित इस दीप में 1001 दीप-कोटर हैं, जिनमें एक साथ 1001 दीप प्रज्वलित किए जा सकते हैं। भारतीय संस्कृति में यह दीप ज्ञान, प्रकाश, समृद्धि, आध्यात्मिक जागरण तथा अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। संग्रहालय अधिकारियों ने प्रतिनिधियों को इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्रतीकात्मक विशेषताओं से अवगत कराया, जिसकी सभी प्रतिनिधियों ने विशेष सराहना की।

ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में 5 से 8 अगस्त 2026 तक आयोजित तीन विशेष प्रदर्शनी भी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें “ज्ञान भारतम” के माध्यम से भारत की प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों एवं ज्ञान परंपराओं, “प्रोजेक्ट मौसम” के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ भारत के प्राचीन समुद्री एवं सांस्कृतिक संबंधों तथा “प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत” के माध्यम से विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के साथ भारत के सभ्यतागत जुड़ाव और ऐतिहासिक प्रभावों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया।

संध्या के समय ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के सम्मान में भारतीय शास्त्रीय कला, लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं एवं समकालीन डिज़ाइन पर आधारित एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसने भारत की “विविधता में एकता” की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति “नवरस – श्रीकृष्ण के जीवन के नौ रस” से हुआ, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय सौंदर्यशास्त्र के नौ रसों का सजीव चित्रण किया गया। इसके पश्चात “काली स्तवन” में देवी काली के शक्ति, साहस, निर्भीकता एवं करुणा स्वरूप को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। वहीं “नर्मदा अष्टपदी” के माध्यम से माँ नर्मदा की पवित्रता, प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को मनोहारी कथक शैली में अभिव्यक्त किया गया।

सांस्कृतिक संध्या का एक प्रमुख आकर्षण नागालैंड के फेक जिले के चकेसांग नागा समुदाय के कलाकार वेस्वुज़ो फेसाओ, वेवोज़ोलू फेसाओ, वेनेतालु स्वुरो एवं ख्रुज़ोलू स्वुरो द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक टाटी लोकगीत रहे। नागा पारंपरिक वेशभूषा एवं टाटी वाद्य यंत्र के साथ प्रस्तुत स्वागत गीत ने पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध लोक संस्कृति, प्रकृति के साथ सामंजस्य एवं सामुदायिक जीवन की जीवंत झलक प्रस्तुत की, जिसकी विदेशी प्रतिनिधियों ने विशेष सराहना की।

कार्यक्रम का भव्य समापन राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, मध्य प्रदेश (NID MP) द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई संकल्पनात्मक रनवे प्रस्तुति “शिखर से तट तक (From the Peak of India to the Shore)” से हुआ। इस प्रस्तुति में हिमालय से लेकर समुद्री तटों तक भारत की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक यात्रा को पारंपरिक एवं समकालीन परिधानों के माध्यम से साकार किया गया। उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम एवं मध्य भारत की वेशभूषा, जनजातीय परंपराएँ, हस्तशिल्प, वस्त्र विरासत तथा प्रकृति से प्रेरित डिज़ाइनों को अत्यंत सृजनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। यह केवल एक फैशन शो नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प कौशल, प्रकृति के प्रति सम्मान और “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा का सशक्त सांस्कृतिक प्रदर्शन था।

इस प्रस्तुति में कुल 29 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें मॉडल, डिज़ाइनर, कॉन्सेप्ट डेवलपर, ड्रेपर, मेकअप एवं हेयर स्टाइलिस्ट शामिल थे। संपूर्ण प्रस्तुति का मार्गदर्शन सोनल बंजारे ने किया, जबकि समन्वय श्रुति निगम एवं जिज्ञासा आर्या द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोक संगीत, पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प, संग्रहालय की मुक्ताकाश प्रदर्शनी, विशेष प्रदर्शनों तथा भारतीय सांस्कृतिक विविधता की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। प्रतिनिधियों ने कहा कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भारतीय सभ्यता, लोक जीवन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं वैश्विक प्रस्तुतीकरण का एक उत्कृष्ट संस्थान है।
मानव संग्रहालय के जान संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि,इस सांस्कृतिक संध्या ने BRICS 2026 के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और सभ्यतागत विरासत का प्रभावशाली परिचय प्रस्तुत किया।

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