
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)01 अगस्त।भोजपुर जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. बलिराज ठाकुर ने की।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. बलिराज ठाकुर ने कहा कि प्रेमचंद गरीब जनता की आवाज़ उठाने वाले लेखक थे और वे हिन्दुस्तान की नई राष्ट्रीय एवं जनवादी चेतना के प्रतिनिधि साहित्यकार थे।प्रेमचंद का मानना था कि “साहित्य का उत्थान ही राष्ट्र का उत्थान है।” कवि-समीक्षक जितेंद्र कुमार ने कहा कि निर्मला के बाद गबन हिंदी साहित्य के यथार्थवाद को नई ऊंचाई देने वाला उपन्यास है। भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रो. दिवाकर पांडेय ने प्रेमचंद के जीवन-वृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी आवश्यकताएं एक सामान्य भारतीय किसान जैसी थीं, इसलिए उनके साहित्य में आम जनजीवन की पीड़ा और संघर्ष का सजीव चित्रण मिलता है। डॉ. नंदजी दुबे ने कहा कि प्रेमचंद ने जाति-प्रथा, धार्मिक अंधविश्वास और जमींदारी व्यवस्था की बर्बरता को अपनी रचनाओं के माध्यम से उजागर किया। डॉ. नथुनी पांडेय और डॉ. सत्यनारायण उपाध्याय ने भी प्रेमचंद के साहित्य के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला।शशिकांत तिवारी, शिवदास सिंह, चंद्रमा दुबे, डॉ. रेणु मिश्र, आचार्य गिरधर, डॉ. अयोध्या प्रसाद उपाध्याय, नर्वदेश्वर उपाध्याय, डॉ. ममता मिश्रा, राकेश कुमार तिवारी तथा राकेश ओझा ‘गुड्डू’ सहित जनमेजय ओझा, जनार्दन मिश्र, रमेश सिंह प्रपन्न और कृष्णानंद कृष्णेन्दु सहित कई कवियों ने काव्य पाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन रूपेन्द्र मिश्र ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिवाकर पांडेय ने किया।
