महिला संवाद बना गाँव में मेले जैसा उत्सव,जागरूकता और आत्मबल का माहौल।
RKTV NEWS/दरभंगा(बिहार )21 मई। दरभंगा जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित महिला संवाद कार्यक्रमों ने सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है।
ग्राम संगठन की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी और संवाद की शैली ने इसे किसी उत्सव जैसा जीवंत और प्रेरणादायक बना दिया।
कार्यक्रम में एलईडी स्क्रीन युक्त जागरूकता वाहन के गाँव में प्रवेश कर जैसे ही यह वाहन गाँव की गलियों से गुजरता है, लोगों की उत्सुकता बढ़ने लगती है।
वाहन पर चल रहे वीडियो और घोषणाओं के माध्यम से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं,महिला अधिकारों और सामाजिक मुद्दों के बारे में जानकारी मिलती है।
बच्चे,बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में वाहन के पास एकत्रित होकर इसे ध्यान से देखते हैं। यह दृश्य गाँव में लगे किसी मेले की तरह उत्सवमय हो जाता है।
गाँव के किसी खुले स्थान पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में पहले से ही महिलाओं का आना शुरू हो जाता है,कुछ महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर आईं,तो कुछ सहेलियों के साथ उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में शामिल हुईं। सभी के चेहरे पर उत्सुकता और उम्मीद की झलक साफ दिखाई पड़ती है।
कार्यक्रम की शुरुआत सरल और सहज रूप से होकर उद्घोषक और ग्राम संगठन की सदस्याओं के स्वागत भाषण से प्रारंभ किया जाता है।
महिला सशक्तिकरण व बालिकाओं के उत्थान से संबंधित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी वाली लघु फिल्म देखने के बाद कुछ दीदियों ने अपने जीवन के संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने की कहानियाँ साझा करती हैं।
बिरौल प्रखण्ड की रेखा देवी ने बताया कि उन्हें सतत जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत 45,000 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई,जिससे उन्होंने चाय और नाश्ते की दुकान शुरू की। अब वे अपने बच्चों की पढ़ाई,दवा और घर खर्च स्वयं चला रही हैं।
कार्यक्रम में गौड़ाबौराम प्रखण्ड की कई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए कि कैसे उन्हें विधवा पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन कार्ड और जनधन खाता जैसी योजनाओं का लाभ मिला।
किरतपुर प्रखण्ड की महिलाओं ने कहा कि जीविका से जुड़ने के पहले वे इन योजनाओं के बारे में जानती ही नहीं थीं, लेकिन अब वे जानकारी लेकर दूसरों को भी जागरूक कर रही हैं।
जब चर्चा सामाजिक मुद्दों पर पहुँची,तो माहौल और भी गंभीर और सजीव हो गया। बाल विवाह, घरेलू हिंसा, शराबबंदी, दहेज प्रथा जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत में कुछ महिलाएं झिझक रही थीं, लेकिन जब बहेड़ी प्रखण्ड की शांति देवी ने कहा, “हमारे घर में भी शराब के कारण बहुत तकलीफ हुई,अब हमने ठान लिया है कि गाँव में शराब नहीं आने देंगे,” तो महिलाओं ने तालियाँ बजाकर उनका समर्थन किया।
वहीं महिलायें बुनियादी सुविधाओं के साथ अपने परिवार के जीविकोपार्जन के लिए स्थानीय स्तर पर उद्योगों की मांग भी लगातार कर रही हैं ।
यह संवाद सिर्फ अनुभवों की साझेदारी नहीं, बल्कि यह महिलाओं को आत्मनिरीक्षण,जागरूकता और संगठन की ताकत का एहसास कराने का अवसर भी दे रही हैं।
समूह में उन्होंने महसूस किया कि वे अकेली नहीं हैं–हर एक की कहानी में एक समान संघर्ष है और साथ मिलकर ही वे बदलाव ला सकती हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं ने एक साथ खड़े होकर संकल्प लिया कि वे स्वयं को सशक्त बनाएँगी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएँगी और अन्य महिलाओं को भी जागरूक करेंगी।
उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने गाँव को बाल विवाह, घरेलू हिंसा और शराब जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त कर नया आदर्श व कीर्तिमान स्थापित करेंगी।
इस संवाद कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने न केवल शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बात की बल्कि संसाधनों की उपलब्धता,लैंगिक समानता और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ संगठित होकर कार्य करने की प्रतिबद्धता भी दिखाई।
कई महिलाओं ने स्वयं को मुखर रूप में प्रस्तुत किया और भविष्य में ग्राम संगठन की गतिविधियों में नेतृत्व करने की इच्छा जताई।
यह देखा गया कि जहाँ पहले महिलाएं केवल श्रोता बनकर बैठती थीं,अब वे मंच पर आकर अपने विचार रखती हैं, सवाल पूछती हैं और समाधान सुझाती हैं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि महिलाएं अब सामाजिक बदलाव की सक्रिय वाहक बन चुकी हैं।

