चंद्रहास बघेल के निर्देशन में कलाकारों ने अभिनय, लोकधुनों और संगीत के जरिए बिखेरे मातृभूमि व नारी शक्ति के रंग।
खैरागढ़/छग (रवींद्र पांडेय) 16 जुलाई। खैरागढ़ के राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय में देशभक्ति और लोक-संवेदना से सराबोर नाटक “वंदे मातरम् : माटी मोर रंग के” का कल सफल मंचन किया गया। संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) की संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव–2026 के अंतर्गत इस नाटक की प्रस्तुति दी गई। यह आयोजन राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने और महाकवि कालिदास जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। इस प्रभावशाली नाटक की प्रस्तुति बाइसन कला फाउंडेशन, अभनपुर (रायपुर, छत्तीसगढ़) द्वारा दी गई।
लगभग 40 कलाकारों की सहभागिता से सजे इस नाटक में भारत माता, प्रकृति, मातृभूमि, नारी शक्ति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अभिनय, संगीत, लोकधुनों व प्रभावशाली मंच-संयोजन के माध्यम से अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया।
युवा रंगकर्मी चंद्रहास बघेल के लेखन एवं निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति ने दर्शकों को देशप्रेम, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, कला-प्रेमियों और दर्शकों ने कलाकारों के सशक्त अभिनय, संगीत, निर्देशन तथा प्रस्तुति की मौलिकता की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे युवा रंगकर्मियों का एक उल्लेखनीय प्रयास बताया।
सफल मंचन के बाद निर्देशक चंद्रहास बघेल ने राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए संगीत नाटक अकादमी और संस्कृति मंत्रालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस आयोजन की सफलता के लिए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ और कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के विशेष सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
अपने मार्गदर्शक और गुरु डॉ. योगेंद्र चौबे एवं भूपेंद्र साहू की प्रेरणा और निरंतर सहयोग के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। देशभक्ति, लोकसंस्कृति और समकालीन सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम बनी यह नाट्य प्रस्तुति दर्शकों के हृदय में अपनी अमिट छाप छोड़ने में सफल रही।

