
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)15 जुलाई। एमएम महिला कॉलेज, आरा की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई की ओर से साक्षरता सप्ताह एवं प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान के तहत मंगलवार को महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में ‘ईको साक्षरता एवं प्लास्टिक मुक्त भारत’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. (डॉ.) एनपी पालित ने की।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. (डॉ.) एनपी पलित ने कहा कि भोजन, वस्त्र और आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएं हैं, लेकिन असीमित उपभोग और लालच ने प्रकृति के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं की है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी का भार वहन करता है, जबकि उसके पास विश्व के केवल चार प्रतिशत मीठे जल संसाधन हैं। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने प्लास्टिक कचरे की बढ़ती मात्रा पर चिंता जताते हुए छात्राओं से पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता स्नातकोत्तर भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. द्वीपिका शेखर सिंह ने कहा कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है, लेकिन असीमित इच्छाएं, लालच और अत्यधिक उपभोग की प्रवृत्ति प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रही है। सरल जीवनशैली, सीमित उपभोग और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने स्वच्छ एवं हरित परिसर की आवश्यकता पर बल देते हुए छात्राओं से महाविद्यालय परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखने और स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. स्मृति चौधरी ने कहा कि ईको साक्षरता का अर्थ केवल पर्यावरण संबंधी जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ अपने संबंध को समझते हुए पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाना है। कार्यक्रम का संचालन स्वयंसेविका सिमरन ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापक एवं एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सुधा निकेतन रंजनी ने किया। कार्यक्रम में डॉ. जुगल प्रसाद, डॉ. विजय श्री, डॉ. अनामिका, डॉ. अवधेश, डॉ. राखी, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. सरोज, डॉ. सुमैला, डॉ. अमरेश, राघवेंद्र, अमरजीत, डॉ. राजबाला, डॉ. आशा कुमारी, डॉ. कंचन कुमारी, डॉ. स्वाति, प्रेम शरण सिंह आदि उपस्थित रहे।
