
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)13 जून।“खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत बड़हरा किसान भवन में एक दिवसीय किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन,आदि वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से के वि केन्द्र के डॉ. विकास सिंह, वैज्ञानिक तथा सोमपाल गंगवार, उप परियोजना निदेशक आत्मा भोजपुर उपस्थित रहे।अपने संबोधन में डॉ. विकास सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में खेती की बढ़ती लागत और घटती मृदा उर्वरता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने खरीफ मौसम में सब्जी एवं फल फसलों की उन्नत खेती पर विशेष जोर देते हुए किसानों को गुणवत्तायुक्त बीजों एवं स्वस्थ पौधों के उपयोग की सलाह दी। प्रो-ट्रे आधारित नर्सरी उत्पादन तकनीक अपनाकर कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार कर सकते हैं। डॉ.सिंह ने किसानों को खेतों में वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की सड़ी हुई खाद, जैव उर्वरकों एवं अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक स्रोतों का समन्वित उपयोग करने से मृदा की संरचना एवं उर्वरता में सुधार होता है तथा फसल उत्पादन लंबे समय तक स्थिर बना रहता है।
सोमपाल गंगवार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेत बचाओ अभियान का मूल उद्देश्य खेतों की उत्पादकता को बनाए रखना तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।इन्होंने खेतों में ढैंचा, सनै, मूंग एवं उड़द जैसी हरी खाद वाली फसलों का प्रयोग करें, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है तथा भूमि की उत्पादकता में सुधार होता है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरुरी है। कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। किसानों ने सब्जी उत्पादन, फलोद्यान प्रबंधन, उर्वरक उपयोग, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा खरीफ फसलों की खेती से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक उत्तर दिया गया।
