कार्यसमिति की बैठक में सम्मेलन पुस्तकालय को दी गयी पुस्तकें, इनमे तमिल सिखाने वाली 5 पुस्तकें भी।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )24मई। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा चेन्नई में स्थापित केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान द्वारा, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन को23अत्यंत मूल्यवान तमिल-हिन्दी द्विभाषिक पुस्तकें निःशुल्क प्रदान की गयी हैं। इन पुस्तकों में तमिल-साहित्य के अनेक महान साहित्यकारों के विश्रुत महाकाव्यों के हिन्दी अनुवाद तथा हिन्दी-भाषियों को तमिल सिखाने वाली पुस्तकें भी सम्मिलित हैं। रविवार को सम्मेलन की कार्य समिति की बैठक में, ये पुस्तकें सम्मेलन-अध्यक्ष डा अनिल सुलभ द्वारा, सम्मेलन पुस्तकालय को प्रदान की गयीं।
इस अवसर पर डा अनिल सुलभ ने बताया कि पाँच खंडों में प्राप्त ‘तमिल करकलाम- तमिल सीखें’ नामक पुस्तकें हिन्दी माध्यम से तमिल सिखाने वाली अत्यंत सरल और सुगम्य हैं। उन्होंने कहा कि तमिल भाषा की वर्णमाला में मात्र 18 ही व्यंजन-वर्ण होते हैं। संस्कृत के अत्यंत निकट होने के कारण, थोड़े श्रम से इसे सरलता से सीखा जा सकता है।
तमिल संस्थान में ‘भाषा-विशेषज्ञ’ के रूप में कार्यरत तमिल और हिन्दी के ख्यातिलब्ध विद्वान डा एम गोविन्द राजन की प्रेरणा से संस्थान के निदेशक प्रो आर चंद्रशेखरन द्वारा सम्मेलन को भेंट की गयी इन पुस्तकों में ‘तोल्काप्पियम’, ‘पत्तुप्पाट्टू’, ‘कलित्तोगै’,’संगम साहित्य’, ‘तिरुक्कुरल’, पतिनेणकीलक्कणक्कु ग्रंथ’, ‘मणिमेखलै’, ‘शिलप्पतिकारम’ प्रमुख हैं। तमिल से हिन्दी में अनुवाद करने वालों में डा एम गोविन्दराजन, डा पी के बालसुब्रह्मणयन, डा पे रामसामी, डा एल वी के श्रीधरन के नाम प्रमुख हैं।
कार्य समिति की बैठक में, केंद्रीय तमिल संस्थान के प्रति धन्यवाद सहित अनेक प्रस्ताव भी पारित किए गए, जिनमें सम्मेलन की स्थायी समिति की बैठक जून में आहूत करने तथा सम्मेलन के आगामी कार्य-काल के लिए अध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी प्रस्ताव भी सम्मिलित हैं। स्थायी समिति में प्रस्तुत किए जाने वाले प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गयी।
बैठक में सम्मेलन के उपाध्यक्ष और बिहार सरकार के पूर्व विशेष सचिव डा उपेन्द्रनाथ पाण्डेय, डा मधु वर्मा, डा पुष्पा जमुआर, कुमार अनुपम, ईं बाँके बिहारी साव, विभारानी श्रीवास्तव, आराधना प्रसाद, डा शालिनी पाण्डेय, कृष्ण रंजन सिंह, प्रवीर कुमार पंकज, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, शमा कौसर ‘शमा’, चंदा मिश्र, डा अमरनाथ प्रसाद, श्री सिद्धेश्वर, डा ऋचा वर्मा, जय प्रकाश पुजारी, अभय सिन्हा आदि अधिकारी एवं कार्यकारिणी-सदस्य उपस्थित थे।

