RK TV News
खबरें
Breaking Newsसाहित्य

बकरी अब पढ़ने चल : बाल हृदय से अनंत आकाश तक की यात्रा

RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)24 मई।डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा*’ की बाल-कविता-संग्रह *’बकरी अब पढ़ने चल‘* पर एक साहित्यिक अवलोकन)समीक्षक – अतुल प्रकाश

साहित्य की सबसे कठिन परीक्षा बाल-साहित्य है। यहाँ न तो शब्दों का आडंबर काम आता है, न विचारों की क्लिष्टता। यहाँ तो चाहिए भोलापन, लय और वह दृष्टि जो तितली के पंखों पर इन्द्रधनुष देख सके। डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ का सद्यःप्रकाशित बाल-काव्य-संग्रह “बकरी अब पढ़ने चल” इस कसौटी पर खरा उतरता है। बक्सर की माटी से उठी यह काव्य-धारा बावन कविताओं के घाट बनाती हुई बाल-मन के समुद्र में जा मिलती है।

आवरण से आरम्भ होती है कथा

पुस्तक का प्रथम दर्शन ही मन मोह लेता है। नीले परिधान में, लाल बस्ता टाँगे, पुस्तक थामे एक बकरी विद्यालय की ओर प्रस्थान कर रही है। उसके संग हैं—चश्माधारी शशक, ग्रन्थ-लीन वानर, जिज्ञासु बालक-बालिकाएँ। यह चित्र-संयोजन मूक भाषा में ही उद्घोष कर देता है: शिक्षा का अधिकार सार्वभौम है। जब पशु-पक्षी भी ज्ञान-पिपासु हो उठें, तो मनुष्य-शिशु का प्रमाद कैसा? ‘बकरी अब पढ़ने चल’—यह शीर्षक मात्र नहीं, युग-चेतना का मंत्र है।

विषय-वैविध्य : कागज की नाव से स्पेस सिटी तक

अनुक्रम पर दृष्टि डालते ही ज्ञात होता है कि रचनाकार ने परम्परा और आधुनिकता का अपूर्व संगम रचा है। एक ओर _’कागज की नाव’, ‘छप-छप पानी’, ‘आ री निंदिया’_ जैसी कविताएँ हैं जो स्मृति के झरोखों से झाँकतीं दादी-नानी की लोरियाँ-सी प्रतीत होती हैं। दूसरी ओर _’गूगल बाबा’, ‘वायरल बुखार’, ‘स्पेस सिटी’_ जैसी रचनाएँ हैं जो 2026 के बालक की शब्दावली से संवाद करती हैं।

डॉ. मीरा जी मनोविज्ञान की प्राध्यापिका हैं, और यह विशेषज्ञता उनकी प्रत्येक पंक्ति में स्पंदित होती है। _’पाँच मिनट सोने दो मम्मी’_ का हठ, _’दीदी करती कान खिंचाई’_ की चिढ़, _’यान दिला दो पापा’_ की ज़िद—ये उद्गार नहीं, बाल-मनोविज्ञान के सटीक दस्तावेज हैं। कवयित्री उपदेशिका की मुद्रा में नहीं आतीं; वे सखी बनकर बच्चे का हाथ पकड़ती हैं और कहती हैं—”मैं तुम्हें जानती हूँ”।

भाषा : गेयता की निर्झरणी

डॉ. महेश मधुकर ने ‘निरूपण’ में सम्यक् ही कहा है—”सरलता, सहजता, बोधगम्यता, गेयता तथा लयात्मकता आपके काव्य का वैशिष्ट्य है।” वस्तुतः इन कविताओं को पढ़ना नहीं पड़ता, ये स्वयं जिह्वा पर नर्तन करने लगती हैं। देखिए—
_”चल कागज की नाव बनाएँ। चप्पू इसमें एक लगाएँ।।”_
_”देखो! इन्द्रधनुष यह न्यारा। सतरंगी है कितना प्यारा।।”_
अनुप्रास और तुक की यह सहज मैत्री कविता को कंठस्थ करा देती है। यह वह भाषा है जो मोबाइल-आक्रांत पीढ़ी को भी पुस्तक की ओर खींच लाने का सामर्थ्य रखती है।

संस्कार और चेतना का समन्वय

यह संग्रह केवल मनोरंजन नहीं करता, मन का निर्माण भी करता है। _’वीर सिपाही’_ में देशभक्ति का उदात्त स्वर है—
_”मैं भारत का वीर सिपाही, नहीं किसी से डरता हूँ।”_
तो _’एक पेड़ माँ के नाम’_ में पर्यावरण-चेतना का मृदु आह्वान है। _’भारत की जय बोलो’_ का ओज और _’लाल परी’_ की स्वप्निलता—दोनों एक ही तट पर मिलते हैं। कवयित्री जानती हैं कि बालक को ‘नागरिक’ केवल नारों से नहीं, संवेदना से बनाया जाता है।

‘अपनी बात’ : रचनाकर्म का घोषणा-पत्र

भूमिका में डॉ. मीरा जी का दुःख मुखर हुआ है—”बच्चों का बचपन पढ़ाई, ट्यूशन और जिम्मेदारियों के बोझ तले दबता जा रहा है। गली-मोहल्लों की किलकारियाँ कम होती जा रही हैं।” यह संग्रह उसी खोई किलकारी की खोज-यात्रा है। कवयित्री का विश्वास है कि कविता बचपन की मुस्कान, मासूमियत और आनंद को सहेज सकती है। और वे इस विश्वास को प्रमाणित कर देती हैं।

उपसंहार : बक्सर से निकली गंगा

1993 से सतत् रचनारत डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ का यह तृतीय बाल-काव्य-संग्रह है। ‘विद्यावाचस्पति’ और ‘भारत गौरव सम्मान’ से अलंकृत इस रचनाकार ने सिद्ध कर दिया है कि साहित्यिक गरिमा और बाल-सुलभता में विरोध नहीं है।

“बकरी अब पढ़ने चल” मात्र पुस्तक नहीं, एक आंदोलन है—उस बचपन को वापस लाने का आंदोलन जो होमवर्क और स्क्रीन के बीच कहीं खो गया है। यह उन समस्त अभिभावकों, शिक्षकों और नीति-नियंताओं के लिए दर्पण है जो पूछते हैं कि बच्चे किताब से विमुख क्यों हैं। उत्तर सरल है: किताब को ‘बकरी’ की तरह भोला, ‘इन्द्रधनुष’ की तरह रंगीन और ‘गूगल बाबा’ की तरह प्रासंगिक बनना होगा।

डॉ. मीरा जी ने यह कर दिखाया है। अतः साहित्य-लोक में इस कृति का सोल्लास स्वागत अवश्यंभावी है।

यह संग्रह हर उस घर में होना चाहिए जहाँ बचपन साँस लेता है। और हर उस विद्यालय में, जो बच्चों के बिना सूना लगता है।

Related posts

उज्जैन: बोन एंड ज्वॉइंट वीक’ के अंतर्गत स्पोर्ट्स इंज्युरी एवं फ्रैक्चर पर व्याख्यान एवं प्रशिक्षण।

rktvnews

भोजपुर:फूड एंड फन फेस्ट का आयोजन छात्रों के समग्र विकास के लिए: चेयरमैन डॉ आदित्य विजय जैन

rktvnews

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने शैक्षणिक वर्ष 2024-2027 के लिए अनुमोदन प्रक्रिया पुस्तिका जारी की।

rktvnews

स्वागत !

rktvnews

छत्तीसगढ : मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें किया नमन।

rktvnews

भोजपुर:बी एस डीएवी में संचालित शिक्षण संवर्धन कार्यशाला में शिक्षण विधियों और संसाधनों के निर्माण पर बल दिया गया।

rktvnews

Leave a Comment