
खेल
खेल बढ़ाता प्रेम दिलों में,
खेल भगाता दूर भेद को,
जीत में खुशी पर हार में गम नहीं, सिक्का जमाने को बढ़ाता होड़ को।
अजय अजेय की तरफ,
राहुल तो हर राहों को रौदता, क्षराा-क्षराा की रोचकता को,
माधुर्य घोल, शिवगुंजन परोसता।
राखी रखती ध्वज को ऊँचा,
ठोकर मारती अपंगता को सोनी,
देती पछज्ञड़ फिर बैठ शिखर पर, ब्युटी बिखेर देती है सोनी।
गुल्ली डंडा, गेंदा के खेल,
खेलऽ कब्बडी, मदुगर भाँज; चिक्का-बाड़ी भूलऽ मत,
दंड-बैठकी और सपाटा मारऽ आज।
ल गुरदेल निशाना साधऽ,
एक सुरिए नदिओ लाँघी जा; तलफत दिन दुपहरी में,
बाग बगीचा में बैठीजा,
धेनु चरावत दिन-दिन भर
फेदा खेली जा।
गुल्ली डंडा, क्रिकेट भइले,
फेदा भइले पोलो,
मुदगर के गोला कहलन सब,
गुरदेल कहाइल तीर अंदाजी।

