नव वर्ष एक संकल्प
सुख और शांति दोनों मिलें,
पूरे साल भरपुर,
देश समाज की दशा भी सुधरे,
ना होवे कोई मजबूर।
हम सोये थे सपने लेकर,
तुम आओगे आधी रात,
नींद खुली तो देखा साल,
सामने करता हमसे बात।
घर-घर में तू जाना।
खुशियाँ ही खुशियाँ बरसाना।
रहे समाज भी ऊँचा,
देश ऊँचे से ऊँचा
शीत, ताप, वर्षा शुभ बीते,
इसे देखने आना।


