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सारण:डिजिटल बदलाव से बदली सरकारी अस्पतालों की तस्वीर,‘भव्या ऐप’ बना मरीजों का सहारा।

सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का नया दौर शुरू।

पर्ची से इलाज तक सब कुछ ऑनलाइन,अब हर मरीज का रिकॉर्ड सुरक्षित

RKTV NEWS/छपरा(सारण)02 अप्रैल। कभी सरकारी अस्पतालों का नाम सुनते ही लोगों के मन में लंबी कतारें, घंटों इंतजार, अव्यवस्था और लचर व्यवस्था की तस्वीर उभरती थी। पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर तक पहुंचने में आधा दिन निकल जाता था। मरीजों के पुराने रिकॉर्ड कागजों में दबे रहते थे और सही इलाज में देरी आम बात थी। लेकिन अब समय बदल चुका है। तकनीक के सहारे बिहार के सरकारी अस्पतालों में एक नई व्यवस्था ने जन्म लिया है, जिसने मरीजों को न सिर्फ राहत दी है, बल्कि भरोसा भी लौटाया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) और मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के तहत शुरू किया गया भव्या (बिहार हेल्थ एप्लीकेशन विजनरी योजना फॉर ऑल) ऐप अब जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत आधार बन चुका है। डिजिटल पहल ने सरकारी अस्पतालों की छवि को बदलने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। अब मरीजों को न केवल सुविधा मिल रही है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उनका भरोसा भी बढ़ रहा है। यह बदलाव आने वाले समय में बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने वाला साबित हो सकता है।

पहले क्या थी स्थिति

कुछ समय पहले तक अस्पतालों में पंजीकरण के लिए मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। ओपीडी में वेटिंग टाइम अधिक रहता था और कई बार मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता था। रिकॉर्ड कागजों में होने के कारण मरीज का पुराना इलाज इतिहास खोजना भी मुश्किल होता था,जिससे सही उपचार में बाधा आती थी।

डिजिटल सिस्टम से आसान हुआ इलाज

डिजिटल पहल के बाद अब मरीज घर बैठे या नजदीकी केंद्र पर ही ऑनलाइन निबंधन करा सकते हैं। अस्पताल पहुंचने पर क्यू मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए उन्हें व्यवस्थित तरीके से डॉक्टर तक पहुंचाया जाता है, जिससे भीड़ और अव्यवस्था में काफी कमी आई है। भव्या ऐप के माध्यम से मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड जांच, दवा और परामर्श डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है। डॉक्टर भी आसानी से मरीज का इतिहास देखकर बेहतर और त्वरित इलाज कर पा रहे हैं।

सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर लागू

जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भव्या ऐप लागू कर दिया गया है। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड और मोबाइल नंबर अनिवार्य किया गया है। निबंधन के बाद मरीज को एक यूनिक आईडी मिलती है, जिससे वह जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज करा सकता है।

मरीजों को मिल रहा सीधा लाभ

सदर अस्पताल में इलाज कराने आए अमरजीत कुमार बताते हैं कि पहले पर्ची बनवाने में काफी समय लगता था, लेकिन अब रजिस्ट्रेशन आसान हो गया है और डॉक्टर भी समय पर मिल जाते हैं। वहीं, कौशल सिन्हा का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से इलाज की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है।

निगरानी भी हुई सख्त

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए अस्पतालों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों द्वारा नियमित समीक्षा से जवाबदेही तय हो रही है और लापरवाही पर कार्रवाई भी संभव हो रही है।

हर मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना लक्ष्य

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और सुलभ बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। भव्या ऐप के माध्यम से मरीजों को पारदर्शी और त्वरित सेवाएं मिल रही हैं। हमारा लक्ष्य है कि हर मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया डिजिटल प्लेटफॉर्म लागू होने के बाद ओपीडी में भीड़ का प्रबंधन आसान हुआ है और वेटिंग टाइम में कमी आई है। स्वास्थ्य कर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया गया है ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो। आने वाले समय में इस व्यवस्था को और सशक्त किया जाएगा।

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