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भोजपुर:भारतीय शिक्षा प्रणाली प्राचीन होते हुए भी अर्वाचीन : प्रो धर्मेन्द्र तिवारी

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)19 नवंबर।वर्तमान में नई शिक्षा पद्धति को लागू तो किया गया है लेकिन प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली से बेहतर सिद्ध हो रहा है। इस संबंध में बातचीत के आधार पर आचार्य धर्मेंद्र ने बताया कि गुरुकुल प्रणाली भारतीय शिक्षा और संस्कृति का एक अमूल्य धरोहर है। यह प्रणाली न केवल ज्ञान का भंडार थी, बल्कि यह एक समग्र जीवन पद्धति थी जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक विकास पर केंद्रित थी। आज के समय में, जब शिक्षा प्रणाली केवल तकनीकी और व्यावसायिक ज्ञान तक सीमित हो गई है, गुरुकुल प्रणाली हमें नैतिकता, संस्कृति, और समरसता का महत्व सिखाती है। इसके पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण से हम एक संतुलित और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।गुरुकुल प्रणाली के महत्व, और प्रासंगिकता पर चर्चा होनी चाहिए।
इन्होंने बताया की गुरुकुल प्रणाली का इतिहास वेदों और उपनिषदों के समय से जुड़ा है। यह प्रणाली गुरु (शिक्षक) और शिष्य (विद्यार्थी) के बीच एक गहन संबंध पर आधारित थी। गुरुकुल आश्रमों में विद्यार्थी गुरु के साथ रहते हुए शिक्षा प्राप्त करते थे।इसकी शुरुआत वैदिक काल में हुई, जहाँ ऋषि-मुनि अपने शिष्यों को वेद, शास्त्र, और जीवन के मूल्यों की शिक्षा देते थे।गुरुकुल में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं था, बल्कि यह एक समग्र विकास का साधन था। इसमें शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक विकास शामिल था।
गुरु और शिष्य के बीच का संबंध अत्यंत गहन और पवित्र माना जाता था।साधारण और सरल जीवन जीने पर जोर दिया जाता था। विद्यार्थी भिक्षाटन (भिक्षा मांगना) करके अपना जीवन चलाते थे।यहाँ जाति, धर्म, या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता था।ध्यान और आत्मचिंतन को अत्यधिक महत्व दिया जाता था, जिससे विद्यार्थी अपने भीतर की शांति और ज्ञान को प्राप्त कर सकें।
देश की परतंत्रता ने इस्लामिक और यूरोपीय आक्रमणों ने गुरुकुल प्रणाली को भारी नुकसान पहुँचाया। लॉर्ड मैकुले की शिक्षा नीति ने गुरुकुलों को सरकारी सहायता से वंचित कर दिया और अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा दिया।
स्वतंत्रता के लगभग 7 दशक बाद नई शिक्षा नीति सुधार चल रहा है। जिसे काफी सहयोग प्रदान करने की जरूरत है।स्थानीय समुदाय और व्यवसायिक संगठनों को गुरुकुलों के विकास में योगदान देना चाहिए।
गुरुकुल प्रणाली पर शोध कर इसके लाभों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करने के प्रयास किए जाने चाहिए।इसके उदाहरण में “तक्षशिला”जहाँ चाणक्य और पाणिनि जैसे महान विद्वानों ने शिक्षा प्राप्त की।
नालंदा विश्वविद्यालय एक प्रमुख गुरुकुल था जो अपने समय में शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था।आधुनिक समय में स्थापित गुरुकुल, जो प्राचीन परंपराओं को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने का प्रयास करते हैं।

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