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राजा राम की न्याय -प्रणाली लोकतांत्रिक थी : डा एस एस उपाध्याय

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 जून। रविवार शाम डा जे बी पाण्डेय के आवास पर अवसर पर राजा राम की न्याय प्रियता पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डा एस एस उपाध्याय सेवा निवृत न्यायमूर्ति और यूपी के महामहिम राज्यपाल के पूर्व विधिक सलाहकार थे।
उन्होंने कहा कि यद्यपि राम का जन्म त्रेता में राज परिवार रघुकुल में हुआ था, लेकिन उनकी न्याय प्रणाली लोकतांत्रिक थी।जब वे अयोध्या के राजा बने तो उनके राज में दैहिक दैविक भौतिक तापा का निर्मूलन हो गया था और समाज में समरसता परिव्याप्त थी। तुलसी के रामचरितमानस में रामराज्य का वर्णन है
दैहिक दैविक भौतिक तापा।रामराज्य नहिं काहुहि व्यापा।सब नर करहिं परस्पर प्रीती।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती। उन्होंने कहा कि सभी अपने धर्म का पालन वैदिक रीति से करते थे, निर्णय में पारदर्शिता थी,कानून की दृष्टि में सभी समान थे।उनका आदर्श वाक्य था कि जिस राजा के राज्य में प्रजा दुखी रहती है,वह राजा अवश्य ही नरक का अधिकारी होता है।राजा के द्वारा गलत करने पर प्रजा को टोकने का अधिकार राम ने जनता जनार्दन को दिया था।स्वतंत्र भारत में राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का सपना राम राज्य की स्थापना था। वर्तमान मोदी सरकार भी उसी राम राज्य के सपने को साकार करना चाहती है। क्योंकि राम की न्याय व्यवस्था में भेद भाव नहीं अपितु पारदर्शिता शीघ्रता और निष्पक्षता थी।अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि न्याय ही निर्णय की आत्मा है।,जिस प्रकार आत्मा के बिना शरीर शव हो जाता है,उसी प्रकार न्याय के अभाव में कोई भी निर्णय निष्प्राण हो जाता है।
रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि राजा राम की न्याय व्यवस्था निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ थी। गलती करने पर उन्होंने अपने प्रिय अनुज लक्ष्मण को राज्य से बहिष्कृत कर दिया था और लोक की आराधना के लिए जानकी तक का परित्याग कर दिया था।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर के संस्थापक प्राचार्य डॉ. वासुदेव प्रसाद ने कहा कि आज भारत वर्ष को राजा राम की न्याय प्रणाली अपनाने की जरूरत है,तभी भारत की न्यायिक व्यवस्था चुस्त और दुरुस्त होगी।
डा हीरानंद प्रसाद,डा विनोद सिंह गहरवार,डा विष्णु जायसवाल,डा प्रशांत गौरव,डा चंद्र मणि किशोर,डा मणिश शर्मा,डा प्रदीप कुमार वर्मा,डा सीमा कुमारी,डा पूनम किंकर , डा गौतम कुमार गुप्ता,शैलेन्द्र कुमार, मन्नु ओझा ,आसमां ओझा ,अंशिका त्रिपाठी आदि ने भी अपने सारगर्भित उद्बोधन से संगोष्ठी में चार चांद लगाया।
डा जे बी पाण्डेय ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत अंग वस्त्रं और सुंदर काण्ड की प्रति देकर किया ।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डा तारामणि पाण्डेय ने, सरस्वती वंदना डा बिनोद सिंह गहरवार ने,कुशल संचालन डा ओम प्रकाश ने और धन्यवाद ज्ञापन डा प्रशांत गौरव ने किया। शांति पाठ और राष्ट्र गान से संगोष्ठी की पूर्णाहुति हुई।

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