
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)26 फ़रवरी।महाशिवरात्रि के शुभावसर पर ज.गु.रा.विद्या वाचस्पति ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य डाँ. धर्मेन्द्र जी महाराज के संचालकत्व में आयोजित गौरीशकर विवाह महोत्सव के अन्तर्गत हिमाचल महाराज के गृहमाता गौरी का माड़ो मटकोड़ा का मांगलिक कार्यक्रम वैदिक और लौकिक ढंग से संपन्न हुआ।वैदिक आचार्यो के मंत्रोच्चार तथा पारंपरिक मांगलिक गीतो से ब्रह्मपुर प्रक्षेत्र गुंजता रहा।आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने गौरीशंकर विवाह के उदेश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विवाह संस्था मे समायी कुरूतियों को दूर करना,नारी शिक्षा का संवर्धन करना, दहेज दानव से समाज को बचाना,प्रर्दशन व दहेज रहित विवाह को प्रोत्साहित करना लक्ष्य है।उन्होंने कहा सनातन विवाह परंपरा वैज्ञानिक वैधानिक और विवेक सम्मत है,बांस का ही माड़ो गाड़ा जाएगा यानी प्रकृति से साम्य,मटकोड़ यानी कृषि से संबधता,हल्दी लेपन यानी आयुर्वेद से संबधता, पोखरा खनाई यानी कृषि कार्य हेतु सिचाई व रेनहार्वेस्टिंग, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। इस अवसर पर शशि भूषण शास्त्री अयोध्या, विसंभर दास अयोध्या,हस्तिनापुर दिल्ली लोनी से आये रघुनंदन रामानुज वैष्णवदास,आचार्य शिवजीपांडे , त्रिगुण स्वामी, बल्भद्र स्वामी, कवि राही जी, आदि ने विवाह संस्था को भारतीय दर्शन आधारित व्याख्या की।महोत्सव को सफल बनाने में जी.पी.एस.के अध्यक्ष ई.ए.के.तिवारी, आश्रम के व्यवस्थापक शिवमोहन तिवारी, लोक सेवक अक्षय कुमार ,लखनऊ कुम्हार, रामजी यादव,सियाराम यादव,मुन्ना यादव, सुमनजी आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
