
प्रयागराज/उत्तर प्रदेश ( डॉ अजय ओझा, वरिष्ठ पत्रकार ) 10 फरवरी। सनातन हिंदुत्व परंपरा को बचाए रखने में हमारे वनवासी समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसी ज्ञान – संस्कार परंपरा के संवर्धन के लिए जनजाति क्षेत्र के संतों को अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है ऐसा मत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने व्यक्त किया।
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित जनजाति समागम का आज संत समागम के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर प्रमुख मार्गदर्शक के नाते सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले बोल रहे थे। इस संत समागम के समय कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, गंगाधर जी महाराज, और दादू दयाल जी उपस्थित थे।
श्री दत्तात्रेय ने आगे कहा कि, हिंदुत्व, भारतीय, सनातन परंपरा के सामने आज विदेशी विचारधारा थोपने के और धर्मांतरण जैसे संकट खड़े है। इन संकटों का सामना करते हुए जनजाति संतों ने सुदूर वन क्षेत्र में अनथक प्रयास किए। उनके इसी प्रयास के कारण आज हिंदू धर्म जीवित है। आने वाले समय में पर्यावरण, अनुसंधान, शिक्षा संस्कार, धर्म जागरण और सेवा के माध्यम से जनजाति समाज में जागृति लाकर अपने समाज की एकता और अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है ऐसा उन्होंने कहा।
कल्याण आश्रम इसी दिशा में कार्यरत है। इसीलिए जनजाति क्षेत्र के सभी साधु संतों ने कल्याण आश्रम का सहयोग देकर इस सनातन संस्कृति को मजबूत करने का काम करना चाहिए ऐसी अपेक्षा होसबाले जी ने अंत में व्यक्त की।
इस समागम में देशभर के विविध प्रांतों से 77 जनजाति समाज के संत – महंत उपस्थित थे। इनमें से कुछ संतों ने जनजाति क्षेत्र के कार्य करते हुए आनेवाली चुनौतियां एवं परिस्थिति के बारे में अपने अनुभव साझा किए।
संत समागम की प्रस्तावना कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने रखी। अपने जनजाति समाज को तोड़ने के विभिन्न प्रयास देश के जनजाति क्षेत्र में चल रहे हैं। इन प्रयासों को विफल करने के लिए सभी साधु संतों ने आगे आकर प्रयास करने की आवश्यकता है, ऐसा सत्येंद्र सिंह ने कहा।
उपस्थित सभी साधु संतों का उत्तर प्रदेश सरकार की कुंभ मेला समिति द्वारा भेंट वस्तु देकर सम्मान किया गया।
