
RKTV NEWS/रवि प्रकाश,18 जनवरी।शाहाबाद क्षेत्र, जो वर्षों से विकास की बाट जोह रहा है, उसकी अहम रेल परियोजनाओं को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। आरा, जो पुराने शाहाबाद जिले का मुख्यालय रह चुका है, आज भी भोजपुर, रोहतास, बक्सर और कैमूर के साथ साथ पूरे भोजपुरी क्षेत्र के जिलों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह शहर भोजपुरी क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा को संजोए हुए है और इसीलिए आरा की योजनाओं का विकास होना न केवल आवश्यक है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के विकास के लिए अपरिहार्य है।
आरा-बलिया रेलखंड: दियारा क्षेत्र और बलिया-आरा के जुड़ाव का सपना
आरा-बलिया रेलखंड केवल दो शहरों को जोड़ने भर का साधन नहीं है, यह गंगा के दियारा क्षेत्र और बलिया जिले को हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेललाइन से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। आरा-बलिया रेलखंड, जो आरा से बलिया तक एक सीधा संपर्क स्थापित करने के लिए जरूरी है, आज भी अधर में लटका हुआ है। यह रेलखंड न केवल भोजपुर और बलिया जिलों को जोड़ने का काम करेगा, बल्कि गंगा के दियारा क्षेत्र के गांवों, जैसे कि धमवल और नैनीजोर जैसे तमाम गांवों के लिए विकास की नई राह खोलेगा। यह क्षेत्र कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है और इस रेलमार्ग से किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह मार्ग पटना और बनारस जैसे बड़े शहरों के बीच एक वैकल्पिक और तेज रूट प्रदान करेगा। यह दियारा क्षेत्र, जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, को विकास के मुख्य धारा में लाने में सक्षम है।
दियारा क्षेत्र की समस्याएं और आरा-बलिया रेल की जरूरत
बाढ़ के दौरान दियारा क्षेत्र में बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना या किसी मृत शरीर को घाट तक पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है।राशन, भोजन और शादी-विवाह जैसे दैनिक कार्य बुरी तरह बाधित हो जाते हैं।
आरा-बलिया रेलखंड से यह क्षेत्र सीधा जुड़कर न केवल परिवहन की सुविधा पाएगा, बल्कि यहां के लोगों के जीवन में एक नई रोशनी आएगी।बलिया के लोगों को हावड़ा-दिल्ली मेनलाइन के साथ-साथ सासाराम, गया होते हुए झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, बंगाल और दक्षिण भारत से सीधा जुड़ाव मिलेगा।

आरा-मुंडेश्वरी रेलमार्ग: चार जिलों को जोड़ने वाली लाइफलाइन
आरा-मुंडेश्वरी रेलमार्ग, जो जगदीशपुर और दिनारा होते हुए जाएगा, शाहाबाद के चारों जिलों (भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर) को आपस में जोड़ने का माध्यम बनेगा। इस परियोजना से जगदीशपुर, जो स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुँवर सिंह की नगरी है, सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।
यह मार्ग क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन स्थलों जैसे माँ मुंडेश्वरी धाम को बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से जोड़कर आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ प्रदान करेगा।
शाहाबाद की रेल योजनाओं का ऐतिहासिक महत्व और नेताओं की प्रतिबद्धता
आरा-बलिया और आरा-मुंडेश्वरी रेलखंड केवल क्षेत्रीय महत्व की परियोजनाएं नहीं हैं। इन पर भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पूर्व रेल मंत्री राम सुभाग सिंह, पियूष गोयल और पूर्व मंत्री आर.के. सिंह जैसे दिग्गज नेताओं ने अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।
आरा: भोजपुरी क्षेत्र का सांस्कृतिक केंद्र और विकास की धुरी
आरा न केवल शाहाबाद का सबसे बड़ा शहर है, बल्कि यह भोजपुरी क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा भी है।
आरा का जुड़ाव इन रेल परियोजनाओं से सुनिश्चित करना भोजपुरी क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक एकता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
आरा की रेल परियोजनाओं को अन्यत्र स्थानांतरित करने का प्रयास क्षेत्र के साथ अन्याय है। आरा-बलिया को रघुनाथपुर से जोड़ने की योजना और दिलदारनगर-मुंडेश्वरी परियोजना पर सर्वेक्षण इस बात का प्रमाण हैं।
आगामी बजट में इन परियोजनाओं के लिए आवंटन हो
सरकार को इन दोनों परियोजनाओं—आरा-बलिया और आरा-मुंडेश्वरी रेलखंड—के लिए पर्याप्त बजट आवंटित करना चाहिए। इन रेलखंडों का निर्माण न केवल शाहाबाद बल्कि पूरे पूर्वांचल और दक्षिण बिहार के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
शाहाबाद की अनदेखी से लोगों में गुस्सा
चाहे आरा-सासाराम दोहरीकरण हो, आरा-बलिया रेलखंड, आरा-मुंडेश्वरी रेलमार्ग या देहरी-बंजारी रेलखंड, शाहाबाद की योजनाओं को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। यह क्षेत्र, जो कभी बिहार का गौरव रहा है, आज उपेक्षा और अन्याय का शिकार है। सरकार को तुरंत इन परियोजनाओं पर काम शुरू करना चाहिए।
