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एक्ट्रेस युविका चौधरी को डेलिवरी के बाद हुआ डिप्रेशन, आइये जानते हैं पोस्ट पार्टम को मैनेज करने के तरीके:डॉ चंचल शर्मा

नई दिल्ली/राहुल ढींगरा 29 नवंबर।अभी कुछ दिनों पहले एक्ट्रेस युविका चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जिसमे उन्होंने बताया कि जहाँ उन्हें एक तरफ माँ बनने की ख़ुशी है वहीँ दूसरी ओर उन्हें पोस्ट पार्टम मोड में डिप्रेशन का सामना करना पड़ रहा है। तो आइये जानते हैं क्या है पोस्ट पार्टम के लक्षण और महिलाओं को कैसे रखना चाहिए अपना ख्याल?

डॉ चंचल शर्मा

आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर तथा स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा ने इस विषय में बताया कि पोस्ट पार्टम की समस्या का सामना प्रेगनेंसी के बाद लगभग 15 प्रतिशत महिलाओं को करना पड़ता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और डिलीवरी के बाद वही बदलाव शरीर, मस्तिष्क, और भावनाओं पर भी देखा जा सकता है। इस दौरान महिलाओं को कई तरह से उतार चढाव का भी सामना करना पड़ता है। उनकी जीवनशैली बिलकुल बदल जाती है, बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी के साथ खुद का ख्याल रखना मुश्किल हो जाता है और महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं।

पोस्ट पार्टम डिप्रेशन को कैसे पहचाने?

पोस्ट पार्टम डिप्रेशन के लक्षण महिलाओं में डिलीवरी के कई हफ़्तों या महीनों बाद तक रह सकता है। अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें:

बार बार रोने का मन होना
भूख ना लगना
नींद ना आना
बहुत ज्यादा निराश रहना
अवसाद या दोषी महसूस करना
आत्महत्या जैसे विचार का आना और कई बार बच्चे को क्षति पहुँचाने का ख्याल आना।

पोस्ट पार्टम डिप्रेशन किन कारणों से हो सकता है?

सामान्यतः एक महिला के शरीर में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का जो स्तर होता है वह गर्भावस्था में 10 गुना बढ़ जाता है और डिलीवरी के तीन दिन बाद ही वह वापस अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है। इन हार्मोनल उतार चढाव के साथ ही बच्चे के जन्म को लेकर होने वाली चिंता, सामाजिक प्रेशर, मनोवैज्ञानिक कारकों के कारण एक महिला को पोस्ट पार्टम डिप्रेशन का सामना करना पड़ता है।

पोस्ट पार्टम डिप्रेशन को कैसे ठीक करें?

जब कोई महिला एक बच्चे को जन्म देती है तब वह एक नया जीवन शुरू करती है जो पहले से बहुत अलग होता है। ऐसी स्थिति में चिंता होना आम बात है लेकिन आपको अपनी चिंता अपने पार्टनर के साथ और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ जरूर साझा करना चाहिए, क्यूंकि वो इससे निपटने में आपकी मदद करेंगे। डॉ चंचल शर्मा बताती हैं कि कुछ ऐसे तरीके हैं जिन्हे अपनाकर आप इस स्थिति से बाहर निकल सकती हैं।
आप अपने आस पास या रिश्तेदारी में एक ऐसे व्यक्ति का चुनाव करें जिसके साथ आप अपनी चिंता खुलकर बाँट सकती हैं। वो आपकी बातों को सुनेंगे और इससे निपटने में आपकी मदद करेंगे।
ऐसे सहायता समूहों में शामिल हों जो नए पेरेंट्स के लिए बना हुआ है। इससे आपको दूसरों के अनुभव जानने का मौका मिलेगा और आपको पता चलेगा की आप अकेले नहीं हैं जो ऐसा महसूस कर रहे हैं।
संतुलित आहार का सेवन करें और थोड़ा समय निकालकर नियमित एक्सरसाइज करें।
जब जरुरत महसूस हो तब आराम जरूर करें।
खुद को समय दें और अपनी पसंद की चीजों को करने में शर्मिंदगी महसूस ना करें।
घर के कामों में जरुरत पड़ने पर दूसरों की मदद लें।

निष्कर्ष: पोस्ट पार्टम डिप्रेशन एक आम मनोविकार है जो डिलीवरी के बाद किसी भी महिला को प्रभावित कर सकता है लेकिन अपने परिवार, दोस्त, डॉक्टर या अन्य सगे सम्बन्धियों की मदद से आप इस डिप्रेशन से बाहर निकल सकती हैं इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है। इसके लक्षणों को ध्यान से समझें और जरुरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क करें।

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