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उत्तर प्रदेश: प्रदूषण की समस्या को कम करना और इसके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभावों से आम जनमानस को बचाने के लिए बागपत में ग्रेप-4 लागू।

अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकले आम जनमानस।

ग्रेप-4 का अनुपालन कराये जाने हेतु निगरानी के लिए 15 विभागों को किया सकिय।

ग्रेप-4 के दृष्टिगत जनपद के सभी निर्माण कार्यों पर लगायी गयी रोक।

स्थानीय लोग और कम्पनिया भी अपने स्तर पर घूल नियंत्रण के लिए पानी का छिडकाव करे।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)18 नवम्बर।राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता खराब होने पर जिलाधिकारी बागपत जितेन्द्र प्रताप सिंह ने ग्रेडिङ रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के चतुर्थ चरण को आज दिनांक 18-11-2024 की प्रातः 08:00 बजे से लागू कर दिया गया है। जिसमें वायु गुणवत्ता प्रबन्धन आयोग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्र, नई दिल्ली द्वारा निर्गत “ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान चरण 4 में दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जनपद बागपत के क्षेत्रान्तर्गत सम्बन्धित विभागों द्वारा ग्रेप-4 का अनुपालन कराया जा रहा है। ग्रेप-4 का उददेश्य प्रदूषण के गंभीर स्तर को कम करना और स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभावों से लोगों को बचाना है। जब ग्रेप-4 लागू हो जाता है तो यह संकेत होता है कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने की स्थिति में पहुँच चुकी है, और तत्काल उपाय किये जाने आवश्यक है। ग्रेप-4 अर्थात “ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान” है। यह एक आपातकालीन कार्ययोजना है, जिसे दिल्ली एन.सी.आर. क्षेत्र में वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया है। ग्रेप-4 तब लागू होता है, जब AQI-450 से ऊपर हो जाता है। यह प्रदूषण के सबसे खतरनाक स्तर को दर्शाता है, जिसके प्रति आम जनमानस को अपने स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट हो जाना चाहिए। आज जनपद बागपत का AQI-500 पहुंच गया है। जिसको देखते हुए जिलाधिकारी ने समस्त जनपदवासियों से अपील की है कि AQI का प्रभाव प्रातः व सांय के समय अधिक रहता है। छोटे बच्चे, वृहद्ध व्यक्ति व गर्भवती महिलाये आदि अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकले, और जब भी बाहर जाना आवश्यक हो तो मास्क आदि का प्रयोगा अनिवार्य रूप से किया जाये। सांस के रोगी ठण्डे पेय पदार्थ व ठण्डे खाने आदि के प्रयोग करने से बचे, और गर्म पानी का ही सेवन किया जाये, विटामिन-सी का प्रयोग करे, ताजे फलों व हरी सब्जियों आदि का अधिकाधिक प्रयोग किया जाये। घर का कूडा आदि एकत्र करके न जलाये।

ग्रेप-4 के तहत उठाये जाने वाले मुख्य कदम

1- जनपद में सभी प्रकार के निर्माण व तोडफोड आदि की गतिविधियों पर रोक लगायी गयी।

2- वाहन प्रतिबन्धित डीजल वाहनों पर प्रतिबन्ध बीएस-3 व 4 व उससे पुराने वाहनों को संचालन की अनुमति नहीं है, और 10-15 वर्ष पुराने वाहन जो प्रतिबन्धित है, उनके संचालन की अनुमति नहीं है। तदकम में परिवहन विभाग द्वारा जो गाडिया 10 वर्ष डीजल व 15 वर्ष पेट्रोल जिन वाहनो की आयु पूर्ण हो चुकी थी. अब तक ऐसे 40,000/- वाहनों के पंजीकरण निलम्बित किये गये है। इसके अतिरिक्त 180-वाहनों का प्रदूषण के अभियोग में जनपद में 180-वाहनों के विरूद्ध चालान करने संबंधी कार्यवाही की गयी है।
3- बिजली आपूर्ति के संबंध में जिलाधिकारी ने निर्देश दिये है कि बिजली आपूर्ति निर्बाध रूप से की जाये, जिससें जनरेटर आदि का प्रयोग कम हो।

4-लोक निर्माण विभाग द्वारा सडको के निर्माण कार्य को पूर्णतः बन्द कर दिया गया है और जहांपर धूल-मिटटी है, उन पर पानी का समय 2 छिडकाव किया जाये। अधिशासी अभियन्ता लोकनिर्माण विभाग द्वारा बताया कि जनपद में चल रही परियोजनाओं या अन्य सडको के कार्यों को पूर्णतः• रोक दिया गया है।
5- अपर जिलाधिकारी (वि/रा)/ प्रभारी अधिकारी (स्था०नि०) बागपत द्वारा बताया गया कि नगर पालिका/नगर पचायतों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाये, कूडा कचरा न जलाया जाये।पानी का छिडकाव होता रहे।

6- कृषि व राजस्व विभाग ने ग्रेप-4 के अन्तर्गत जो किसान पराली जला रहे थे, उन पर प्रभावी कार्यवाही करते हुए अंकन 12500/- रूपये का जुर्माना भी अधिरोपित किया गया है।
7- औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगायी गयी है, और जनरेटर का प्रयोग न किया जाये।

7.इण्डस्ट्रीयल वेस्ट को न जलाया जाये।

8- खनन विभाग की खनन सम्बन्धित सभी गतिविधिया ग्रेप 4 के अन्तर्गत रोक दी गयी है।

एनसीआर क्षेत्र के एयर क्वालिटी इन्डेक्स (AQI) की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है, जिससे जनमानस को सांस लेने में कठिनाई व अन्य सम्बन्धित बीमारियों से जूझना पड रहा है। एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने आसपास किसी भी तरह का प्रदूषण न फैलने दे. और जनपद को स्वस्थ्य व स्वच्छ बनाने में अमूल्य सहयोग दे। वायु प्रदूषण कम करने के लिए पानी का छिडकाव एक प्रमुख कदम है। इसके जरिये सडकों व खुले क्षेत्रो में उड़ने वाली घूल को नियंत्रित किया जाता है, जो वायु गुणवत्ता को खराब करने में मुख्य भूमिका निभाती है। स्थानीय लोगों और कम्पनिया भी अपने स्तर पर घूल नियंत्रण के लिए पानी का छिडकाव अवश्य किया जाये।

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