छठी मैया को अर्घ देने का संध्याकालीन समय 5: 45 और प्रातः कालीन समय 5:55।
RKTV NEWS/ज्योतिषाचार्य संतोष पाठक,26 मार्च।बिहार का छठ महापर्व।नहाए खाए खरना सहित चार दिवसीय चैती छठ महापर्व प्रारंभ हो चुका है सोमवार को (दिनांक 27 मार्च 2023 )
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा। मंगलवार को उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन किया जायेगा।
ऐसा मान्यता है कि छठ महापर्व में व्रतियों की छठी मैया खुद रक्षा करती है और अपनी कृपा बरसाती है।ऐसी भी मान्यता है कि जिसको संतति (संतान) नहीं हो रहा है अगर वह छठ व्रत करे तो उसको संतान की प्राप्ति होती है।
निरोगी काया के लिए भी छठ व्रत को लोग धूमधाम से करते हैं।पुराणों में भी छठ महाव्रत का विस्तृत उल्लेख मिलता है
छठ महापर्व कठिन महापर्व है इस व्रत में जल का भी ग्रहण नहीं किया जाता है।
शहर और गांव के युवा वर्ग के लोग इसमें तन मन धन से सहयोग करते हैंऔर छठी घाट का आने जाने वाले रास्ते की साफ सफाई कर रंगोली बनाते और दीपक भी जलाते हैं।
जगह जगह प्रातः कालीन सभी छठ व्रतियों के लिए गाय का दूध की भी व्यवस्था रहती है छठी मैया को अर्घ देने के लिए।




छठी मैया को अर्घ देने का संध्याकालीन समय 5: 45 और प्रातः कालीन समय 5:55।