
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 अक्टूबर। जगत जननी मां दुर्गा की स्तुति तो प्रत्येक सनातनी के घर में प्रतिदिन होती हैं लेकिन नवरात्र में नौ दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों का पूजा अर्चना की जाती है।नवरात्रि भारत में सबसे जीवंत त्यौहारों में से एक है। यह त्यौहार करोड़ों लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है। नवरात्रि का त्यौहार सनातन धर्मावलंबियों के बीच गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। “नवरात्रि” शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है, “नव” जिसका अर्थ है नौ और “रात्रि” जिसका अर्थ है रात। ये नौ रातें दिव्य स्त्री ऊर्जा की पूजा के लिए समर्पित हैं। यह त्यौहार न केवल धार्मिक महत्व बल्कि सांस्कृतिक विविधता का भी प्रतीक है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। जिसमें माँ दुर्गा उस दिव्य शक्ति का प्रतीक हैं जिन्होंने राक्षस महिषासुर को परास्त किया था। देवी दुर्गा के नौ रूप विभिन्न गुणों और शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। नवरात्रि’ उत्सवपूर्ण नवीनीकरण के अवसर की नौ रात्रियां हैं। नवरात्रि व्रत का मूल उद्देश्य है इंद्रियों का संयम और आध्यात्मिक शक्ति का संचय। वस्तुत: नवरात्र अंत:शुद्धि का महापर्व है।आज वातावरण में चारों तरफ विचारों का प्रदूषण है। ऐसी स्थिति में नवरात्र का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। अपने भीतर की ऊर्जा जगाना ही देवी उपासना का मुख्य प्रयोजन है। दुर्गा पूजा और नवरात्र मानसिक-शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं। महाअष्टमी एवं महानवमी की हार्दिक शुभकामनाएं। माँ भगवती की कृपादृष्टि सभी पर बनी रहे।
