
RKTV NEWS/भोपाल (मध्यप्रदेश)05 अक्टूबर।हिंदी और मैथिली के प्रसिद्ध कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु के प्रसिद्ध उपन्यास ‘मैला आँचल और फ़िल्म तीसरी कसम की कहानी मारे गए गुलफ़ाम’ पर दुष्यंत संग्रहालय में चर्चा हुई।
डॉक्टर प्रतिमा लच्छवाणी के शोध ग्रंथ ‘आधुनिक परिवेश में फणीश्वर नाथ रेणु : व्यक्तित्व एवं सृजन, एक विश्लेषण’ और नंद कुमार सन्मुखानी के ग़ज़ल संग्रह ‘रोशनी के बीज’ का लोकार्पण डॉक्टर साधना बल बटे की अध्यक्षता और श्याम कस्तूरे के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।
सर्वप्रथम समीक्षक सुरेश पटवा ने फणीश्वर नाथ रेणु : व्यक्तित्व एवं सृजन की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए रेणु जी के व्यक्तिव और उनकी प्रमुख रचनाओं में से ‘मैला आँचल’ और प्रसिद्ध कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ की प्रबुद्ध समीक्षा प्रस्तुत की। अशोक जमनानी ने भी समीक्षा पढ़ी।
ग़ज़ल संग्रह ‘रोशनी के बीज’ के रचयिता नंद कुमार सन्मुखानी ने संग्रहण से चुनिंदा ग़ज़ल का पाठ किया। जनाब मुहम्मद इक़बाल सिद्दीक़ी और अशोक निर्मल ने ग़ज़ल संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत की।
डॉक्टर साधना बलबटे ने अध्यक्ष की आसंदी से बोलते हुए कहा कि रेणु जी एक भारतीय आत्मा थे। उनका कथा संसार यही सिद्ध करता है। मुख्य अतिथि श्याम कस्तूरे ने पुस्तकों में समाहित विषय सामग्री की विशद विवेचना प्रस्तुत की।
अंत में बड़ी संख्या में पधारे रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। डॉक्टर प्रतिमा लच्छवाणी ने ‘एक मंदिर’ ,देव अर्जवानी ने ‘खिलाने की दुकान पर’, नारी प्रतिमा लच्छवाणी ने ‘वो अनजान छुहन’, महेश मूलचंदानी ने ‘नाई मददगार हो जिनका’, कनयो सेवानी ने ‘मालामाल यहाँ वो होता’, सुरेश पटवा ने वजन उठाती हैं औरतें’, डॉक्टर प्रतिभा द्विवेदी ने छाले हुए हैं’, पुरुषोत्तम साहित्यार्थी ने’ काव्य गोष्ठी का सरस संचालन नर्मदा नगर से पधारे अशोक जमनानी ने किया। कार्यक्रम का संयोजन उपस्थित साहित्य रसिकों का आभार प्रदर्शन वरिष्ठ कवि अशोक निर्मल ने किया। संचालन द्रौपदी चंदनानी ने किया।
