
RKTV NEWS/डॉ परमानन्द लाभ,28 सितंबर।पुरानी और नयी पीढ़ी की प्रत्येक अदाकारा की आवाज को अपनी आवाज में मिझरा लेने वाली कमाल की गायिका, संगीत निर्देशक, निर्माता व अभिनेत्री स्वर-कोकिला लता मंगेशकर 28 सितंबर 1929 को इंदौर, मध्यप्रदेश वासी शास्त्रीय गायक दीनानाथ मंगेशकर की धर्मपत्नी शेवंती मंगेशकर की कोख से प्रगट हुई थी। पिता ने अपनी इच्छा के अनुरूप छड़ी से पीट-पीटकर माधुर्य और आकर्षण का बेमिसाल तोहफ़ा राष्ट्र की आवाज, सहस्राब्दी की आवाज लता बेटी के रुप में विश्व को दिया, जिसने 20 से अधिक भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने को सुरीली स्वर दी। प्रदीप का गाना ‘ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी…’ गा कर वह न केवल एक सार्वजनिक सभा में तालियां बटोरने में कामयाब हुई, अपितु मौके पर मौजूद पंडित नेहरु की आंखों को डबडबा कर ‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया ‘ की उपाधि हासिल करने में सफलता अर्जित कर ली। ‘आनंद घन’ बैनर तले मां सरस्वती की सतत साधिका लता अपने गायन के लिए 1958, 1960, 1965 व 1969 में फिल्म फेयर एवार्ड अपने नाम तो करवा हीं सकी, ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ‘ से भी सम्मानित हुईं।

1990 में पुणे विश्वविद्यालय ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से और 1999 में भारत सरकार ने ‘पद्मविभूषण ‘ से विभूषित कर लताजी के प्रति कृतज्ञता अर्पित किए। 2001 में तत्कालीन राष्ट्रपति के द्वारा इन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न ‘ प्राप्त हुआ।
आवाज की जादूगरनी लताजी का लव अफेयर्स तो डूंगरुपुर के राजा क्रिकेटियर राज सिंह, मशहूर म्युजिशियन भूपेन हजारिका, उस्ताद सलामत अली खान, रामचन्द्रन आदि कतिपय हस्तियों के साथ रहा, लेकिन दाम्पत्य-जीवन का सुख उनके नसीब में नहीं रहा।
संगीत की दुनिया में हलचल पैदा करने वाली स्वर-कोकिला लता मंगेशकर आखिर ईश्वर के क्रूर पंजा से खुद को नहीं बचा सकी और 92 वर्ष की अवस्था में कोविड ने उन्हें 6 फरवरी 2022 को मुंबई के अस्पताल में लील लिया।
प्रसिद्धि की बुलंदी पर पहुंची विभूति लताजी को उनके जन्म-दिवस पर शत-शत नमन।
