
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)25 सितंबर। राज्यसभा के सदस्य रहते हुए दिनकर जी ने मार्च 1961 में एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें कहा गया है कि बिहार को सुधारने का सबसे अच्छा रास्ता यह है कि लोग जातियों को भूल कर गुणवान के आदर में एक हों।यदि जातिवाद से हम ऊपर नहीं उठे तो बिहार का सार्वजनिक जीवन गलत हो जाएगा। उक्त बातें भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो बलिराज ठाकुर ने मंगलवार को आर.टी.एम स्कूल में दिनकर जयंती पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही। प्रोफ़ेसर ठाकुर ने कहा कि दिनकर जी को साफ लगा कि लोकतंत्र यदि प्रतिभा तंत्र नहीं बनता है तब देश का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। प्रोफेसर ठाकुर ने दिनकर जी को क्रांतिकारी चेतना का राष्ट्र कवि बताते हुए कहा कि दिनकर जी भारतीय संस्कृति का इतिहासकार थे।मुख्य अतिथि दर्शन शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर महेश सिंह ने कहा कि दिनकर जी भारतीय संस्कृति के उपेक्षित सत्यों को स्पष्ट करते हुए अपनी बात कहते हैं।परशुराम की प्रतिक्षा देश की सम सामयिक समस्याओं की प्रतिक्रिया में सामने आई। भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ नंद जी दूबे ने कहा कि दिनकर जी में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक चेतना के साथ सांस्कृतिक चेतना भी गहरे रूप में मौजूद थी।समाजसेवी शिवदास सिंह ने कहा कि दिनकर जी उदघोष और उदवोधन के कवि तो थे ही,वे प्रेम और सौंदर्य के भी कवि थे। जनार्दन मिश्र ने कहा कि दिनकर जी की कविताओं से प्रभावित होकर ही मैं कविता लिखने लगा। भोजपुर जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिव शशिकांत तिवारी ने स्वागत और संचालन किया तथा गणेश तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। डॉक्टर सत्यनारायण उपाध्याय ने दिनकर जी को महान राष्ट्र कवि बताते हुए कहा कि आज उनकी बातें सही लग रही हैं। मौके पर जगत नंदन सहाय,युगेश्वर सिंह, डॉक्टर विश्वनाथ चौधरी, दिलीप कुमार पांडेय ,भुवनेश्वर ठाकुर, रमेश सिंह श्री प्रपन्न , डॉक्टर नथुनी पांडेय,जितेंद्र शुक्ला सहित कई लोगों ने दिनकर जी की साहित्य -साधना पर प्रकाश डाला।
