
हिंदी!
हिन्दी राष्ट्र माता है
यह भेद किसी से न कर
प्यार सबसे करती है
अपनी मधुर वाणी से
यह मन सबका मोहती है।
दूर दूर तक यह सैर करती है
सब ठौर यह सम्मान पाती है
सभा में जब यह बोलती है
सभा मौन हो सुनती है।
जन जन की पीर
यही मिटाती है
हर संकटों का
हल यही निकालती है
इसीलिए यह
संकट मोचनी कहलाती है।
अपनी हर बहनों को
निराश न कर
उनका पूर्ण सम्मान करती है
सभी को अपने घर में
यह बोलने का अधिकार देती है।
राष्ट्र उत्थान में भी यह
पूर्ण अवदान करती है
राष्ट्र मध्य सब काल यह
शाँति सौहार्द एकता का
अच्छा माहौल बनाती है।
हम यही कहेंगे अंततः कि
हम सब भारतवासी
अपनी इस राष्ट्र माता हिंदी पर
गर्व करें सश्रद्ध।

