
आरा/भोजपुर(डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)01 सितंबर।भारतीय संगीत का मूल रूप वैदिक संगीत है जिसके श्रवण मात्र से मन पवित्र हो जाता है । 111वें कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह में सुर लय व ताल के संगम से आरा में प्रयाग जैसी अनुभूति है । इस समारोह की निरंतरता अनुकरणीय है । लगातार 111 वर्ष तक ठाकुरजी के चरणों में शुद्ध संगीत का रागभोग लगाना करना अद्भुत समर्पण है ।
आरा का यह सांगीतिक आयोजन ऐतिहासिक है । उक्त बाते अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायक पंडित रामप्रकाश मिश्र ने कही अवसर था बक्शी कुलदीप नारायण कल्चरल सोसाईटी द्वारा आयोजित111वां श्री कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह की छठी निशा सह समापन सत्र का । इस अवसर पर पंडित रामप्रकाश मिश्र ने राग जयजवंती में एकताल विलंबित की बंदिश “पिया हम जानिले तिहारी घात” छोटा ख्याल “ऐसो नवल लाडली राधा” ठुमरी “मोहना लुभायो कवन देश “कजरी हमरे सवारिया नही आये छाई घटा घंघोर” प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया ।
वही पप्पू महाराज के नाम से मशहुर तबला वादक अनूप कुमार दुबे ने बनारस शैली के तबला वादन से समां बाँधा। वहीं शिवनंदन प्रसाद श्रीवास्तव ने स्वतंत्र तबला वादन में कई क्लिष्ट गत व फर्द के प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया। विदुषी विमला देवी ने राग तिलंग में तीनताल की बंदिश “प्यारी लागी छबिधर की दृगन छवि” प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी ।
कथक नर्तक अमित कुमार ने तालों के राजा तीनताल में शुद्ध कथक प्रस्तुत करते हुए भाव अभिनय से श्रोताओं का दिल जीत लिया । वही कथक की द्वितीय प्रस्तुति में नर्तक राजा कुमार व छपरा की कुमारी रूपा ने कृष्ण राधा का आवरण कर तालों की श्रृंखला दर्शाते हुए ताल पंचमसवारी, झपताल व द्रुत तीनताल में बोल बंदिशों को बखूबी निभाया व तालियां बटोरी । कियाना विधार्थी ने नयनाभिराम नृत्य किया । संचालन बक्शी विकास व धन्यवाद ज्ञापन आदित्या श्रीवास्तव ने किया।
