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एक शताब्दी से अनवरत कायम है भोजपुर में संगीत परम्परा।

RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)21 अगस्त।जब भी कृष्ण जन्माष्टमी का अवसर आता है तो आरा महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी के संगीत समारोह की खुशबू से सुगंधित होने लगता है। भोजपुर में यह विशाल संगीत परंपरा एक शताब्दी से अनवरत कायम है । इस समारोह की शुरुआत कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सन 1914 में स्व. बक्शी बृजविलास बिहारी एवं स्व. बक्शी कौशलेश बिहारी ने की। वर्तमान में यह परम्परा शास्त्रीय कलाओं का संरक्षण स्थल बन चुका है। छ: रातों तक प्रवाहित होती है शास्त्रीय संगीत की रसधारा में एक से बढ़कर एक कला प्रस्तुतियां होती हैं ।

स्वर्णिम इतिहास ने संजोया है समारोह की महत्ता

ध्रुवपद-धमार से शुरू हुये इस संगीत समारोह की गरिमा बनाए रखने और इसे देशभर में पहचान दिलाने के लिए महान संगीत द्वारक स्व. बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा को हमेशा जाना जाएगा। समारोह के दौरान अक्सर श्रोता और कलाकार उन्हें याद करते रहते हैं। कुलदीप जी के दिवंगत होने के बाद इनके पुत्र स्व. बक्शी अवधेश कुमार श्रीवास्तव व पुत्रवधू शास्त्रीय विदुषी बिमला देवी ने इस परम्परा का निर्वहन किया l अब यह जिम्मेदारी उनके पौत्र चर्चित कथक नर्तक बक्शी विकास निभा रहे हैं। इस तरह चार पीढ़िया संगीत सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित किया है ।

भारत रत्न शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां भी कर चुके हैं शिरकत

देश के सर्वोच्च सम्मान से विभूषित कई विश्वविख्यात कलाकारों में भारत रत्न शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खां, पद्मभूषण वीजी. जोग, तबला सम्राट पंडित कंठे महाराज, तबला सम्राट पंडित गामा महाराज, पद्मविभूषण पंडित किशन महाराज, पद्मभूषण पंडित सामता प्रसाद उर्फ गोदई महाराज, पंडित रंगनाथ मिश्र, पद्मविभूषण विदुषी गिरजा देवी पद्मश्री पंडित सियाराम तिवारी, पंडित रामचतुर मलिक, पद्मभूषण एन.राजम, संगीत, पद्मभूषण बेगम प्रवीण सुल्ताना, नाटक अकादमी पुरस्कृत विदुषी सुनन्दा पटनायक जैसे विभूतियों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाया।

पूरी रात श्रोता संगीत की त्रिवेणी में गोते लगाते हैं

इस संगीत समारोह की लोकप्रियता ने श्रोताओ को सदैव बांधे रखा। स्तरीय कार्यक्रम की रोचकता के कारण रात भर श्रोताओ की भीड़ लगी रहती थी। संगीतज्ञ भी काफी होते थे। इसलिए कार्यक्रम का समापन होते होते सुबह हो जाती थी और राग भैरवी से समापन होता था। “बाजूबंद खुली-खुली जाय सावरिया ने कैसो जादू डाला” ठुमरी का विस्तार व तबले के साथ दरभंगा के पंडित रामदीन पाठक के खंजड़ी की लयकारी पर श्रोता झूम उठते थे। दशरथ ठाकुर के कत्थक पर पंडित रंगनाथ मिश्र के अद्भुत तबला संगति को याद करते आज भी रोमांचित हो उठते है पुराने दर्शक।

सुविख्यात व स्थानीय कलाकारों का एक मंच पर प्रदर्शन

आयोजन के सुनहरे स्मृतियों में बनारस के सितार वादक पंडित सुरेंद्र मोहन मिश्र, कलकत्ते की कत्थक नृत्यांगना चंद्रा घोष-तन्द्रा घोष , दरभंगा के पंडित रामदीन पाठक, पटियाला घराने के गायक पंडित हरी भजन सिंह, जंगली मल्लिक, ऋखेश्वर तिवारी, हिरा भगत-रामसकल पंडित, चंद्रशेखर पाठक, अखौरी नागेन्द्र नारायण सिन्हा उर्फ नंदन जी, रामविलाश ओझा, दामोदर शरण, लक्ष्मी जी, हनुमान प्रसाद उर्फ मोहन जी, सुरेंद्रचार्य जी, लक्ष्मण शाहाबादी (सभी गायक), कत्थक नर्तक दशरथ ठाकुर, राम जी पांडेय, सारंगी वादक हंसा जी, तबला वादक अम्बिका सिंह , द्वारिका सिंह, मनन जी, महावीर सिंह, अरविन्द कृष्ण, सितार वादक राजेंद्र शर्मा, दामोदर पाठक, बासुरी वादक चंद्रशेखर सिंह, सखीचंद जी का नाम प्रमुख है।

कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह का भविष्य

इस समारोह के मुख्य संयोजक गुरु बक्शी विकास बताते हैं एक ओर स्वर्णिम इतिहास है तो दूसरी ओर उसकी गरिमा बरकरार रखने का प्रयास जारी है। आज भी राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात कलाकार इस समारोह में शिरकत करते हैं । बनारस घराने के मशहुर गायक पंडित रामप्रकाश मिश्र, तबला वादक पंडित भोलानाथ मिश्र, सितार वादक पंडित ध्रुवनाथ मिश्र, घरानेदार कलाकार प्रीतम मिश्र समेत कई स्थानीय व अन्य प्रदेशों के कलावंतों द्वारा ठाकुरजी की सेवा में रागभोग लगाने की परंपरा जारी है । इस वर्ष इस समारोह का 111वां पुष्प ठाकुरजी को समर्पित होगा ।

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