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भोजपुर:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया अखण्ड भारत संकल्प दिवस।

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)15 अगस्त। बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरा महाविद्यालयीन विद्यार्थी विभाग द्वारा आरा के विभिन्न कोचिंग संस्थानों अखण्ड भारत संकल्प दिवस मनाया गया कार्यक्रम में बौद्धिक कर्ता के रूप में ललन जी, अशोक कुमार सुब्बू, अभिषेक कार्यक्रम के जिला महाविद्यालय प्रमुख उत्तम जी एवम रितिक जी अन्य स्वयंसेवक उपस्थित रहे। बौद्धिककर्ता ने कहा कि आरएसएस अपने स्थापना काल से ही हर वर्ष 14 अगस्त को अखंड भारत संकल्प दिवस मनाता आया है। परंतु, समाज का एक बड़ा हिस्सा इस बात को भूलता जा रहा है कि जब भारत अखंड था तो कैसा था संघ का मानना है कि आने वाली पीढ़ी के साथ-साथ समाज के लोगों को इसकी याद दिलाने की आवश्यकता है, इसलिए संघ ने शाखा के साथ-साथ सार्वजनिक रूप से भी कार्यक्रम करने की योजना बनाई है।
परम पूजनीय सरसंघचालक डाक्टर मोहन भागवत जी कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं कि लोगों को अपने “स्व” के बारे में जानना चाहिए। अंग्रेजों मुगलों के आने से पहले हम कैसे थे स्वाधीनता के पहले , हमारा देश कैसा था, इसे सभी को जानना चाहिए हमारा भारत का अखण्ड स्वरूप कैसा था और पुनः उसी स्वरूप में हम लाएंगे अखण्ड भारत हमारी माँ है भारत को पुनः अखण्ड बनाएंगे स्वामी विवेकानंद ने कहा उठो जागो अपनी लक्ष्य की प्राप्ति करो तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए इसलिए आप सभी भारत को पुनः अखण्ड बनाने में कदम से कदम मिला के चले सभी अपने संकल्प के प्रति पूर्ण दृढ़ संकल्पित होंगे आगे बढ़े अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है. जिन आंखों ने भारत को भूमि से अधिक माता के रूप में देखा हो, जो स्वयं को इसका पुत्र मानता हो, जो प्रात: उठकर “समुद्रवसने देवी पर्वतस्तन मंडले, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यम् पादस्पर्शं क्षमस्वमे. “कहकर उसकी रज को माथे से लगाता हो, वन्देमातरम् जिनका राष्ट्रघोष और राष्ट्रगान हो, ऐसे असंख्य अंत:करण मातृभूमि के विभाजन की वेदना को कैसे भूल सकते हैं, अखण्ड भारत के संकल्प को कैसे त्याग सकते हैं? किन्तु लक्ष्य के शिखर पर पहुंचने के लिये यथार्थ की कंकरीली-पथरीली, कहीं कांटे तो कहीं दलदल, कहीं गहरी खाई तो कहीं रपटीली चढ़ाई से होकर गुजरना ही होगा.
15 अगस्त को हमें आजादी मिली और वर्षों की परतंत्रता की रात समाप्त हो गयी. किन्तु स्वातंत्र्य के आनंद के साथ-साथ मातृभूमि के विभाजन का गहरा घाव भी सहन करना पड़ा. 1947 का विभाजन पहला विभाजन नहीं है इसके पहले भी श्रीलंका अफगानिस्तान कई विभाजन हुए अखण्ड भारत माता को कई टुकड़े टुकड़े में बाटा गया माँ के पुत्र है हमसभी हमारा कर्तव्य बनता है कि भारत को अखण्ड बनाए भारत माता की जय।

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