
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 अगस्त।आज 11 अगस्त को श्रीरामचरित मानस’ के माध्यम से जनमानस और मन-मानस के हृदय में सियाराम की छवि को दिल की गहराईयो में उतारने वाले संत शिरोमणि बाबा तुलसीदास की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन निवेदित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शशि मिश्र ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदासजी जैसा श्रेष्ठ व्यक्तित्व सम्पन्न पुरुष मध्य युग में कदाचित् ही कोई मिलेगा। तुलसीदासजी ने अपने गहन ज्ञान और व्यक्तित्व के अनुरूप समन्वय किया। उन्होंने लोक और शास्त्र का ही नहीं, वैराग्य और गार्हस्थ का, भक्ति और ज्ञान का, भाषा और संस्कृति का, निर्गुण और सगुण का पुराण और काव्य का, पण्डित और अज्ञानी का, ब्राह्मण और चाण्डाल का, आदर्श और व्यवहार का, प्रवृत्ति का एवं ऊँच और नीच का अपूर्व समन्वय किया। तुलसीदासजी ने सामाजिक, पारिवारिक, आध्यात्मिक, धार्मिक, राजनीतिक आदि सभी क्षेत्रों को अपनाया और इन सभी क्षेत्रों में समन्वय स्थापित करके सामाजिक विषमता को दूर किया। सत्य तो यह है कि भक्त, दार्शनिक, पण्डित, कवि, नीतिज्ञ, समाज-सुधारक और विचारक के रूप में तुलसीदास जी का महान व्यक्तित्व सम्पूर्ण वैचारिक धरातल पर छाया हुआ है। तुलसीदासजी अपने समन्वयवादी दृष्टिकोण के कारण लोकनायक है। तुलसीदासजी समन्वयवादी के साथ-साथ मर्यादावादी भी थे। समन्वय के आवेश में उन्होंने कही भी धर्म के असत् रूप और लोक धर्म की विरोधी प्रवृत्तियों से समझौता नहीं किया। लोक मर्यादा का उल्लंघन, चाहे वह किसी भी रूप में हो, उनके लिए असह्य था। उनके मतानुसार मर्यादा के बिना अपने सामाजिक कल्याण आकाश-कुसुम के समान है। अपने इस मर्यादावाद से तुलसीदास किसी के सुख को बलात चोट नहीं पहुंचाना चाहते हैं। तुलसीदासजी का मर्यादावाद जन-कल्याण के निमित्त है।
