
RKTVNEWS/आरा (भोजपुर)09 अगस्त।सावन की बहती बयार में चमकत बिजुरीया कारी बदरिया व रिमझिम बारिश के बूंदो के साथ कजरी गायन से प्रकृति सुगन्धित हो उठता है। भारतीय परंपरा में इसे पावस पर्व के रूप में मनाया जाता है। धरती चतुर्दीक हरियाली से ध्वनित हो उठता है ऐसे सावन का संगीत तन मन को झंकृत कर देता है। उक्त बाते कही गुरु बक्शी विकास ने कहा।
अवसर था शिवादी कळसिक सेंटर ऑफ़ आर्ट एन्ड म्यूजिक द्वारा आयोजित पावस पर्व व रागाभोग का। इस कार्यक्रम में आनंद कंद कौशल चंद ठाकुर जी के सावन का श्रृंगार हुआ तत्पश्चात श्रावनी संगीत की प्रस्तुतियों ने समां बाँधा। पटना से पधारे तबला के विद्वान कलाकार श्री शिवनन्दन प्रसाद श्रीवास्तव ने पवना लय में घंटो क्लिष्ट बंदिशों व पावस परणों की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विदुषी विमला देवी ने राग नायकी कान्हाड़ा में तीनताल की बंदिश “सांवरे सलोने आजु झूलत झूलनावा ऋतू पावस आयो’ से समां बाँधा।
वही श्रेया पांडेय ने सावन में गिरे रस बुंदिया सखी री हम गाईले कज़रिया” प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। युवा गायक अजीत पांडे ने ” सावन झरी लागे हो धीरे धीरे” प्रस्तुत कर तालिया बटोरी। विश्वनाथ राय ने झूला गीत प्रस्तुत किया।
स्नेहा पांडेय, गौरी, विनीता व चित्रा ने कजरी पर मनोहारी भाव अभिनय प्रस्तुत किया।इस मौसमी संगीत के कार्यक्रम में मड़नपुर गाँव निवासी मोहम्मद अब्दुल जब्बार ने क्लारनेट वादन से अद्भुत समाँ बाँधा। मंच संचालन अमित कुमार व धन्यवाद ज्ञापन महेश यादव ने किया। इस अवसर पर कवियित्री डॉ. किरण कुमारी, सुशील कुमार देहाती, चंद्रमोहन ओझा समेत कई संगीत प्रेमी उपस्थित थे।

